इंदौर। प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता सीमित है और इन्हें बचाना बेहद जरूरी है। आज पूरी दुनिया पानी की कमी से जूझ रही है। पानी की बचत के लिए शहर के दो युवा इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स ने एक ऑटोमेटेड प्रोजेक्ट बनाया है। इसमें उन्होंने दो मॉड्यूल बनाए हैं, जो पानी की बचत करेंगे। भारत गोस्वामी और एकता चिखलिया ने इसे तैयार किया है। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट में दो तरह के मॉड्यूल बनाए हैं। पहला हमारे घरों की पानी की टंकी के लिए है। हमारे घरों में आमतौर पर पानी की टंकी भरने पर अलार्म बजता है, लेकिन हमें उसे फिर बंद करने जाना पड़ता है।

यदि किसी कारण से आप टंकी को चालू छोड़कर बाहर चले जाते हैं तो उसमें पानी काफी बह चुका होता है। इस नए सिस्टम में घर की टंकी भरते ही मोटर अपने आप बंद हो जाएगी। वहीं टंकी खाली होने पर मोटर अपने आप चालू हो जाएगी। इसके लिए एक एंड्रॉइड ऐप भी तैयार किया गया है, जिससे आप कहीं से भी टंकी में पानी की स्थिति देख सकते हैं। टंकी भरने पर यूजर को मोबाइल पर मैसेज भी मिल जाएगा। खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट की लागत महज 900 रुपए ही है।

नमी कम होते ही पौधे को मिल जाएगा पानी

इस प्रोजेक्ट के दूसरे मॉड्यूल में पौधों के लिए सेंसर बेस्ड सिस्टम बनाया गया है। आज के समय में कम ही लोगों को समय मिलता है कि वे नियमित तौर पर पौधों में पानी दे सकें। इस सिस्टम में एक सेंसर की मदद से मिट्टी का मॉइश्चर पता किया जाएगा, जिसकी मदद से उसे पता चलेगा कि पौधे को कब और कितने पानी की जरूरत है। जब भी पानी की जरूरत होगी तो उसमें पानी जाएगा और जरूरत पूरी होते ही पानी जाना बंद हो जाएगा। यह सारा काम ऑटोमेटिक होगा। इसके लिए भी एक एप्लीकेशन बनाई है, जिसमें पता चल सकेगा कि कब पौधे को पानी की जरूरत है या उसका मॉइश्चर लेवल क्या है। इस तकनीक का उपयोग किसान भी कर सकते हैं।

इस सिस्टम के जरिए फसलों में ऑटोमेटिक पानी देने का सिस्टम लगाया जा सकता है। किसान को मोबाइल पर मैसेज आते रहेंगे कि आपकी फसलों में पानी जा रहा है। जब उनकी जरूरत पूरी हो जाएगी, तब पानी की मोटर बंद हो जाएगी और मैसेज आ जाएगा कि आपकी फसल को पूरी तरह पानी मिल चुका है।