Indore News: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए मिली शासकीय राशि के गबन और हेराफेरी को लेकर जिले की चार ग्राम पंचायतों के सरपंच और एक पंचायत सचिव के खिलाफ सांवेर, हातोद और चंद्रावतीगंज थानों पर धोखाधड़ी के मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। इनमें मुरादपुरा पंचायत के सरपंच हरि परमार, पुवार्ड़ाहप्पा के सरपंच सिकंदर पटेल, कांकरियाबोर्डिया की सरपंच कृष्णा गोपाल पांचाल, जिंदाखेड़ा पंचायत की सरपंच रिंकू राहुल राठौर और सचिव रामप्रसाद राठौर शामिल हैं। कलेक्टर मनीषसिंह ने इन ग्राम पंचायतों की जांच कराई गई जिसमें लाखों रुपये का गबन सामने आया। इन ग्राम पंचायतों में नियमों के विपरीत राशि निकालकर अनियमितताएं की गईं।

मुरादपुरा में कच्चे बिलों पर खरीदी

मुरादपुरा पंचायत में 14वें वित्त आयोग से 6 लाख 32 हजार रुपये की खरीदी की गई। इनमें से 60 हजार 810 रुपये की काजू कतली और बर्फी खरीदी गई है। पूरी खरीदी कच्चे बिलों से की गई है। आदिम जाति कल्याण विविध मद और 15वें वित्त आयोग में कुल 15 लाख रुपये से अधिक की खरीदी की गई। इसमें अधिकांश निर्माण सामग्री धरमपुरी की एक ही फर्म संदीप ट्रेडर्स से खरीदी गई।

पुवार्ड़ाहप्पा में सरपंच ने अपनी ही फर्म से खरीदी निर्माण सामग्री

पुवार्ड़ाहप्पा पंचायत में वर्ष 2019 से लेकर 2021 तक 24 लाख 41 हजार से अधिक की निर्माण सामग्री, बिजली का सामान आदि की खरीदी की गई। सरपंच सिकंदर पटेल ने अपनी फर्म के अलावा अपने परिवार की अन्य फर्मों से यह सामग्री खरीदी। इनमें शिप्रा और बूढ़ी बरलाई की हकीम पटेल की फर्म शामिल है। पंचायत में भृत्य गब्बर के नाम से 22 हजार 500 रुपये की राशि निकाली गई जबकि उसकी नियुक्ति ही नहीं की गई।

सचिव के बेटे की दुकान से खरीदा बिल्डिंग मटेरियल

ग्राम पंचायत जिंदाखेड़ा ने वर्ष 2019 से अब तक दो साल में बिल्डिंग मटेरियल और अन्य सामग्री खरीदने के लिए 36 लाख 43 हजार रुपये से अधिक राशि निकाली। पंचायत ने इसमें से अधिकांश निर्माण सामग्री जीवन ट्रेडर्स से खरीदी। यह फर्म पंचायत सचिव रामप्रसाद राठौर के पुत्र के नाम से है, लेकिन ताज्जुब की बात है कि जांच में यह फर्म पते पर थी ही नहीं।

कांकरियाबोर्डिया में 8 लाख से अधिक की हेराफेरी

कांकरियाबोर्डिया पंचायत में 8 लाख 36 हजार रुपये से अधिक की अनियमितता पाई गई। नवंबर 2020 में भाटिया आर्ट्स सांवेर को पेंट और पुताई के लिए 12 हजार 670 रुपये का भुगतान दिखाया गया, लेकिन दुकान के संचालक ने बताया कि उसे केवल 1100 रुपये ही दिए गए।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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