Indore News : इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। बच्चों में गठिया जितना घातक है, उतनी ही मुश्किल इसकी पहचान है। समय पर पहचान न हो और उपचार न मिले तो बच्चों की ऊंचाई कम रह सकती है। गठिया के कुछ प्रकार तो इतने घातक हैं कि वे बच्चों के दिल, दिमाग और गुर्दे तक को खराब कर देते हैं।

खास बात यह है कि ये नुकसान स्थायी होता है, यानी दवाइयां शुरू होने के बाद भी गठिया की वजह से खराब हुए ये अंग पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाते हैं। देश में बच्चों के गठिया रोग विशेषज्ञों की संख्या डेढ़ सौ से भी कम है। यही वजह है कि गठिया रोग विशेषज्ञों की एसोसिएशन ने वार्षिक कांफ्रेंस के माध्यम से बच्चों के डाक्टरों को रूमेटोलाजी से जुड़ी बीमारियों के लक्षण, उपचार की जानकारी देने के लिए विशेष सत्र आयोजित किया है। यह बात गठिया रोग विशेषज्ञों की वार्षिक कांफ्रेंस आयराकान -2022 में पीजीआइ चंडीगढ़ से आए डा. सुरजीतसिंह ने कही।

बच्चों में गठिया के प्रकार -

  • कावासाकी बीमारी : यह बीमारी दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों में होती है। इसके लक्षणों में बुखार, शरीर पर लाल चकते, आंखें और होंठों का लाल होना शामिल है। गठिया रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बीमारी की पहचान पांच से सात दिन में हो जानी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर बीमारी की वजह से बच्चों के हृदय को नुकसान पहुंचने लगता है। यह नुकसान स्थायी होता है।
  • हिनोक्स शानलाइन परक्यूरा : गठिया का यह प्रकार भी बच्चों को अपना शिकार बनाता है। इसके सामान्य लक्षणों में बच्चों के पैरों में लाल चकते, जोड़ों में सूजन और पेट दर्द शामिल हैं। इस बीमारी की वजह से बच्चों के गुर्दे प्रभावित होते हैं। समय पर इलाज न मिले तो गुर्दे स्थायी रूप से खराब हो सकते हैं। मुश्किल यह है कि इस बीमारी की पहचान के लिए कोई टेस्ट नहीं होता। ब्लड टेस्ट में इसकी रिपोर्ट निगेटिव ही आती है।
  • लूपस : यह भी बच्चों में होने वाले गठिया का एक प्रकार है। लूपस की वजह से गुर्दा, दिमाग सीधे प्रभावित होता है। इसका समय रहते इलाज जरूरी है। इसके मुख्य लक्षणों में बुखार, चेहरे पर दानें आदि हैं।

Posted By: Hemraj Yadav

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