Indore News : इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। हमारे देश में एक वर्ष में सिर्फ 60 नए गठिया रोग विशेषज्ञ तैयार होते हैं। यह संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि हर जिले में कम से कम एक गठिया रोग विशेषज्ञ उपलब्ध हो। सभी मेडिकल कालेजों में गठिया रोग विशेषज्ञ की सीटें बढ़ाई जा रही हैं। यह बात रूमेटोलाजी एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. बीजी धर्मानंद ने कही। वे रूमेटोलाजिस्ट एसोसिएशन आफ इंडिया की 37वीं वार्षिक कांफ्रेंस आयराकान-2022 के तहत इंदौर में आयोजित प्री कांफ्रेंस के दूसरे दिन बोल रहे थे।

उन्होंने बताया कि जागरूकता के अभाव के कारण गठिया रोग से जुड़ी बीमारियां बीमा और सरकारी योजनाओं का हिस्सा नहीं हैं। हम इस संबंध में जागरूकता बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। कांफ्रेंस के आर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डा. आशीष बाडिका ने कहा कि पहली बार राष्ट्रीय कांफ्रेंस में साइंटिफिक प्रोग्राम के साथ ही गठिया की विभिन्न बीमारियों में मौसम और जीवनशैली के प्रभाव, रूमेटोजिक बीमारियों के दौरान सही आहार, पारंपरिक भारतीय दवाइयों के असर, बीमारी के दौरान खान-पान जैसे विषयों को रखा गया है। गुरुवार को बच्चों के डाक्टर और जनरल फिजिशियन के लिए विशेष सत्र आयोजित किया गया था।

किफायती हो रही बायोलाजिकल दवाइयां - आर्गेनाइजिंग चेयरपर्सन डा. वीपी पांडे ने बताया कि कांफ्रेंस में 400 प्रोजेक्ट प्रस्तुत होंगे। 20 अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी वर्चुअली शामिल होंगी। नेपाल, श्रीलंका, जापान, अमेरिका और ब्रिटेन से 40 अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी इंदौर आई हैं। प्री कांफ्रेंस के दौरान अलग-अलग विषयों पर 18 कार्यशालाएं हुईं। राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. धर्मानंद ने कहा कि बायोलाजिकल दवाइयों को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। जिन मरीजों पर किसी अन्य दवा का असर नहीं होता है, सिर्फ उन्हीं पर इन्हें इस्तेमाल किया जाता है। यह अच्छी बात है कि समय के साथ इन दवाओं की कीमतें कम हो रही हैं।

जोड़ों में दर्द है तो विशेषज्ञ को ही दिखाएं - दिल्ली से आए गठिया रोग विशेषज्ञ डा. एसजे गुप्ता ने कहा कि गठिया रोग में इलाज दवाइयों के जरिये ही किया जाता है। अगर किसी मरीज को बार-बार इंजेक्शन की जरूरत पड़ रही है, तो इसका अर्थ है कि दवाइयां ठीक से काम नहीं कर रही हैं। जिस तरह सीने में दर्द होने पर व्यक्ति को पता होता है कि हृदय रोग विशेषज्ञ को दिखाना है, उसी तरह हमें पता होना चाहिए कि जोड़ों में दर्द है तो हमें गठिया रोग विशेषज्ञ को ही दिखाना है।

ओपीडी में आधे से ज्यादा मरीज गठिया के - केरल से आए वैद्य पी. राममनोहर ने गठिया के आयुर्वेदिक इलाज पर विशेष सत्र को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि आयुर्वेदिक दवाइयां प्रारंभिक स्तर पर गठिया के इलाज में अच्छा असर दिखाती हैं। हमारी ओपीडी में आने वालों में आधे से ज्यादा मरीज गठिया बीमारियों के होते हैं। माडर्न मेडिसिन और आयुर्वेद मिलकर काम करें तो गठिया बीमारियों के इलाज में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया जा सकता है। कई शोधों में प्रमाणित हुआ है कि आयुर्वेदिक दवाइयां गठिया के मरीजों की रोगप्रतिरोधक क्षमता में भी इजाफा करती हैं।

Posted By: Hemraj Yadav

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