इंदौर। एमजीएम मेडिकल कॉलेज में सोमवार को वायरल रिसर्च डायग्नोस्टिक लैब, वायरल लोड लैब व सुसज्जित ऑडिटोरियम का लोकार्पण किया गया। पांच करोड़ 79 लाख स्र्पए की लागत से तैयार तीनों सुविधाएं कॉलेज को सौंपी गईं। वायरल रिसर्च डायग्नोस्टिक लैब में एड्स के मरीजों की सेकंड लाइन की जांच हो सकेगी जिससे एचआईवी पॉजिटिव मरीजों के उपचार को और भी सुरक्षित किया जा सकेगा। यह लैब प्रदेश के किसी भी मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध नहीं है। वायरल लोड लैब में स्वाइन फ्लू, डेंगू, जीका वायरस सहित अन्य वायरस की जांच हो सकेगी। सरकारी अस्पताल से आने वाले सैंपल गरीब मरीजों के लिए निशुल्क रहेंगे, वहीं प्राइवेट अस्पतालों से आने वाले सैंपल का शुल्क लिया जाएगा। शुल्क का निर्धारण कॉलेज प्रबंधन करेगा। चिकित्सा शिक्षा मंत्री की उपस्थिति में ये सौगात शहर को सौंपी गई।

कार्यक्रम के दौरान चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ने बताया कि प्रदेश के अन्य अस्पतालों में भी वायरल लोड लैब बनाना प्रस्तावित है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में आज भी डॉक्टरों की कमी है। इसके लिए सरकार व्यवस्था कर रही है। आगामी समय में पीजी व यूजी स्टूडेंट्स के लिए एक साल तक गांव में सेवा देना अनिवार्य होगा। 2022 तक सीट भी दोगुनी होंगी।

पहले बॉन्ड भरवाते थे जो पैसा देकर इसे पूरा कर देते थे। अब हम सेवा को अनिवार्य करेंगे। पहले जिन्होंने बॉन्ड पूरा नहीं किया, ऐसे केस सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि नौ माह में ही वायरोलॉजी लैब का निर्माण पूरा हुआ है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज में बने ऑडिटोरियम को सरकारी कामों के अलग घर जैसा बनाया गया है। राज्य की जनता को स्वास्थ्य सेवा बेहतर मिले, इसे लेकर सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

बिना आयुष्मान योजना वाले मरीजों की फीस पर उन्होंने कहा कि अभी अनिवार्य नहीं है। उन्होंने अंगदान के क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज में राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संस्थान (सोटो) द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

10 नए मेडिकल कॉलेज खोलने का दिया प्रस्ताव

उन्होंने बताया कि प्रदेश में 10 नए मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए केंद्र में प्रस्ताव बनाकर दिया है। चार-पांच कॉलेज मिलने का अनुमान है। पीजी व यूजी सीट बढ़ाने के लिए भी केंद्र में प्रस्ताव दिया है। कई प्रदेशों में ट्रांसप्लांट को लेकर रैकेट भी चल रहे हैं। हमारे प्रदेश में ट्रांसप्लांट का काम सही तरीके से हो, इसके लिए सोटो को मजबूत किया है। कार्यक्रम में पूर्व डीन डॉ. शरद थोरा, एमवायएच के अधीक्षक डॉ. एडी भटनागर, पूूर्व अधीक्षक डॉ. पीएस ठाकुर, डॉ. सलिल भार्गव, डॉ. सुमित शुक्ला, डॉ. केके अरोरा, डॉ. मनोहर भंडारी, डॉ. अनिता मूथा, डॉ. पूनम माथूर, डॉ. वीपी पांडेय व प्रवक्ता डॉ. राहुल रोकड़े मौजूद रहे।

जांच रिपोर्ट के लिए नहीं करना होगा लंबा इंतजार

संभागायुक्त आकाश त्रिपाठी ने कहा कि सभी को इलाज की बेहतर सुविधा मिले, यह हमारी जवाबदेही है। स्वाइन फ्लू की जांच यहीं होने से रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा। जल्द ही और भी विकास पूरे होंगे। मार्च 2020 तक सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

एमवाय अस्पताल में खाली जगह का उपयोग कर 240 बिस्तरों की व्यवस्था की जाएगी। एमवायएच में सुविधाएं जुटाने का काम भी लगातार जारी रहेगा। बोन मैरो ट्रांसप्लांट की संख्या हर साल 50 करने का लक्ष्य रखा गया है। बोन मैरो ट्रांंसप्लांट के लिए मरीजों की आर्थिक मदद के लिए सीएसआर फंड से राशि जुटाई जा रही है।

मेडिकल कॉलेज डीन डॉ. ज्योति बिंदल ने कहा कि एमजीएम मेडिकल कॉलेज देश के दस श्रेष्ठ मेडिकल कॉलेजों में शामिल हो, यह प्रयास हमेशा रहा है। उन्होंने बताया कि जब पिताजी एमवायएच में डीन थे, तब वे परिसर में ही रहती थी और कॉलेज के आसपास साइकिल चलाते हुए पहुंचती थी।

एमजीएम मेडिकल कॉलेज में सुविधाएं

- प्रदेश का दूसरा मेडिकल कॉलेज जहां बनी वायरल लोड लैब

- संभाग सहित पूरे प्रदेश के मरीजों की हो सकेगी स्वाइन फ्लू व अन्य जांचें

- 1 करोड़ 74 लाख स्र्पए की लागत से बनी है वायरल रिसर्च डायग्नोस्टिक लैब

- 1 करोड़ 35 लाख स्र्पए की लागत से बनी है वायरल लोड लैब

- 2 करोड़ 70 लाख स्र्पए में 70 साल पुराना ऑडिटोरियम हुआ सुसज्जित

Posted By: Sandeep Chourey