Indore News : इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। गुब्बारा चाहे लाल हो या काला, छोटा हो या बड़ा, कीमती हो या सस्ता चाहे कैसा भी हो, अगर उसमें हवा भरी है तो निश्चित समझें कि उसे जाने से कोई रोक नहीं सकता। ठीक उसी प्रकार से हमारे जीवन रूपी गुब्बारे में भक्ति रूपी हवा भरी है तो उसे सिद्धालय में जाने से कोई रोक नहीं सकता। हम सब को भक्ति की महत्ता समझना चाहिए।

यह बात आर्यिका पूर्णमति माता ने छत्रपति नगर दलालबाग में कही। वे दस दिनी भक्तामर महामंडल विधान में संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि जिस समाज में विधि विधान पूर्वक पूजा पाठ नहीं होता, उसके समाजजन में आपस में वात्सल्य नहीं होता। परिवार में सुख शांति चाहते हों तो सभी सदस्य एक साथ मिलकर भोजन करें और समाज में वात्सल्य चाहिए तो मिलकर भजन करें। पापी जीव पाप से नहीं डरता, लेकिन पाप के फल से कांप जाता है।

मन एक प्रोजेक्टर जो इंद्रियों के चित्र दिखाता है

पूर्णमति माता ने कहा कि जीवन में हमारी आत्मा और चेतन को जितना जानने का प्रयास किया जाएगा, जीवन में उतना ही आनंद आएगा। मन एक प्रोजेक्टर है जो पर्दे पर केवल इंद्रियों के चित्र दिखाता है। मनुष्य शरीर को ही सब कुछ मान कर उसके सौंदर्य में ही लगा है ।अत: सौंदर्य की ओर उसका ध्यान ही नहीं जाता। आत्मा की चर्चा में जब हम लीन हो जाते हैं तब सब कुछ भूल जाते हैं, जिसकी चर्चा में इतना आनंद है तो उसकी जब हम अनुभूति करेंगे तो कितना आनंद प्राप्त होगा। जीवन में हमें अपनी आत्मा की पहचान करनी है यही हमारा लक्ष्य होना चाहिए। संसार में अगर कुछ देखने योग्य है तो वह केवल निज आत्मा ही है लेकिन मनुष्य निज को छोड़ पर में अधिक ध्यान लगाए हैं।

Posted By: Hemraj Yadav

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