इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सरकार ने कोटवार को परिवार के जीवन यापन और खेती के लिए करीब 10 बीघा शासकीय भूमि दी। वह वर्षों से इस पर खेती करके परिवार के अनाज पैदा कर रहा था, लेकिन उसके मन में लालच आ गया। उसने जमीन का एक हिस्सा मुरम और गिट्टी खोदने के लिए खनन के ठेकेदारों को दे दिया। ठेकेदारों ने इस जमीन को पोकलेन मशीन से खोदना शुरू कर दिया। बदले में कोटवार एक डंपर मुरम के 400 रुपये ले लेता था।

यह हकीकत है इंदौर तहसील के ग्राम तिल्लौर खुर्द की। सोमवार को खनिज अधिकारियों ने इस अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई जरूर की, लेकिन वास्तव में ग्राम पंचायत ने इसकी शिकायत पटवारी बालाराम चौधरी से काफी पहले कर दी थी। यह शिकायत तहसीलदार राजेश सोनी तक भी पहुंची थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। सोमवार को खनिज अधिकारियों ने कार्रवाई कर तीन पोकलेन और डंपर जब्त किया था।

उल्लेखनीय है कि शासन ने पूरे प्रदेश में ग्राम कोटवारों को कुछ शासकीय भूमि खेती के लिए प्रदान की है। इसे सेवा भूमि नाम दिया गया है। तिल्लौर खुर्द में भी कोटवार रुघनाथ गुलाबसिंह को सेवा भूमि मिली हुई है। शासन के नियम हैं कि सेवा भूमि न तो किसी अन्य को बेची जा सकती है, न ही इसमें कोई निर्माण या खनन जैसी गतिविधियां की जा सकती हैं। इसके बावजूद कोटवार रुघनाथ ने सेवा भूमि में अवैध खनन करके इससे गैरकानूनी तरीके से पैसा कमाना शुरू कर दिया। इंदौर के खनन ठेकेदारों को जमीन खोदाई के लिए सौंप दी। बदले में वह हर डंपर पर तय राशि लेने लगा। लंबे समय से यह सिलसिला चल रहा था। पटवारी को शिकायत के बाद भी लंबे समय तक किसी ने ध्यान नहीं दिया। ग्रामवासियों का कहना है कि खनन के लिए चल रहे डंपरों से तिल्लौर खुर्द और तिल्लौर बुजुर्ग के बीच का रास्ता खराब होता जा रहा है। रात-दिन चल रहे डंपरों से लोग परेशान थे।

Posted By: dinesh.sharma

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