Indore News : इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। मां के खराब चाल-चलन का 13 साल की बच्ची पर ऐसा असर हुआ कि उसने घर छोड़ दिया। सहेली के घर रहने चली गई और एक कारखाना में काम कर खुद की परवरिश करने लगी। पांच माह बाद पुलिस ने उसे ढूंढा तो घर जाने से मना कर दिया। पुलिस महिला मजिस्ट्रेट के पास ले गई और बयान दर्ज करवाए। सुनवाई के बाद मजिस्ट्रेट ने भी बच्ची को सही ठहराते हुए बुआ के सुपुर्द कर दिया।

वाकया एरोड्रम थाना क्षेत्र स्थित राजनगर का है। कालोनी में रहने वाली 13 वर्षीय बच्ची पांच माह से लापता थी। पुलिस अपहरण समझकर मामले की जांच कर रही थी। शुक्रवार सुबह पुलिस ने बच्ची को बाणगंगा थाना क्षेत्र की एक कालोनी से ढूंढ लिया। महिला पुलिस अफसर ने बात की तो बच्ची ने कहा वह माता-पिता के पास नहीं जाएगी। उसकी मां का चरित्र अच्छा नहीं है। वह तीन पति बदल चुकी है। इस कारण उसकी पढ़ाई भी छूट गई। पिता उसे सहायिका के रूप में रखते हैं। मां भी घर का सारा काम उसी से करवाती है। शनिवार सुबह पुलिस ने बच्ची को महिला मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश कर धारा 164 के तहत बयान दर्ज करवाए। कोर्ट में भी बच्ची ने मां की करतूत बताई और थाने में दर्ज बयान दोहराए। मजिस्ट्रेट ने बच्ची के कथन से सहमत होते हुए बुआ के सुपुर्द कर दिया।

सहेली के साथ प्रिंटिंग कारखाना में नौकरी कर रही थी बच्ची - एसआइ लक्ष्मणसिंह मुजाल्दे के मुताबिक बच्ची घर छोड़ने के बाद सहेली के साथ रहती थी। घर की परिस्थिति से वाकिफ होने के कारण सहेली के माता-पिता ने रहने की सहमति दे दी थी। उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बच्ची एक प्रिंटिंग कारखाना में काम कर खुद का खर्चा वहन करने लगी। बच्ची के बरामद होने की खबर मिलते ही बुआ थाने पहुंची और अपने पास रखने की इच्छा जताई। पुलिस ने कहा नाबालिग बच्ची को कोर्ट की इजाजत से ही सौंपा जा सकता है। पुलिस ने कोर्ट के समक्ष बयान करवाए तो बच्ची ने बुआ के पास जाने की इच्छा जता दी।

Posted By: Hemraj Yadav

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