इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सत्र न्यायालय ने एक आपराधिक अपील की सुनवाई करते हुए कहा है कि मानसिक, शारीरिक प्रताड़ना भी घरेलू हिंसा की श्रेणी में आती है। पति से अलग रह रही पत्नी की मूलभूत आवश्यकताएं जैसे खाना, कपड़े और हाथ खर्च उपलब्ध नहीं कराना भी आर्थिक घरेलू हिंसा है। कोर्ट ने आदेश दिया कि पति पत्नी को 25 लाख रुपये एकमुश्त और 15 हजार रुपये प्रतिमाह अदा करे।

कोर्ट ने यह आदेश बिल्डर और इंजीनियर महेंद्र पुत्र हीरालाल राजोरिया को दिया है। राजोरिया की पत्नी ने पति के खिलाफ सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। दंपती के बीच आपसी विवाद होने पर पत्नी ने जिला न्यायालय में भरण-पोषण के लिए दावा दायर किया था। 2008 में इस मामले का निराकरण करते हुए कोर्ट ने पति को आदेश दिया था कि वह प्रतिमाह पत्नी को पांच हजार रुपये अदा करे। इस फैसले के खिलाफ पत्नी ने एडवोकेट केपी माहेश्वरी के माध्यम से सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। महेंद्र की शादी करीब 26 वर्ष पहले हुई थी। कुछ साल बाद ही उनका पत्नी से विवाद होने लगा। बाद में दंपती अलग-अलग रहने लगे। पति ने कोर्ट में तर्क रखे थे कि पत्नी खुद कमाने में सक्षम है। उसे किसी तरह का गुजारा भत्ता देने की आवश्यकता ही नहीं है, लेकिन कोर्ट ने इन तर्कों को खारिज कर दिया।

महिला ने फांसी लगाकर आत्महत्या की - मांगलिया स्थित मंगल विहार कालोनी में रहने वाली 33 वर्षीय महिला ने सोमवार देर रात घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।पड़ोसियों के मुताबिक कालोनी में रहने वाला राजेश जोशी महिला को बहन मानता था। कुछ दिन पूर्व घर में महिला के नौ वर्षीय बेटे ने दोनों को संदिग्ध हालात में देख लिया और यह बात पिता से कह दी। इसके बाद पति ने महिला से उसका मोबाइल फोन ले लिया। फोन पर बात नहीं होने पर राजेश परेशान रहने लगा और तीन-चार दिन पहले राजेश ने घर आकर हंगामा किया और महिला के सामने ही उसके पति को धमकाया व बच्चों को जान से मारने की धमकी दी। इस घटना के बाद महिला परेशान रहने लगी। आशंका है कि इसी के चलते उसने यह कदम उठाया। आरोपित राजेश की भी शादी हो चुकी है और दो बच्चे हैं। वहीं महिला के भी दो बेटे हैं।

Posted By: Hemraj Yadav

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