इंदौर, नईदुनिया रिपोर्टर। लगातार 12 घंटे दौड़ना आसान नहीं है और वह भी उस उम्र में जब लोग आराम करने का सोचते हैं। सरकार ने भी रिटायरमेंट की उम्र अधिकतम 62 वर्ष रखी है, मगर 70 साल की उम्र में भी हर रोज 12 से 15 किमी दौड़ना किसी चुनौती से कम नहीं। शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक ताकत लिए 70 वर्षीय श्रीनिवास सिंह 12 घंटे तक दौड़ेंगे। यह पहला मौका नहीं है, जब वे इतनी देर दौड़ेंगे । पिछले वर्ष भी वे 12 घंटे तक लगातार दौड़ चुके हैं।

इसका उद्देश्य खुद को सेहतमंद रखना और दूसरों को इसके लिए प्रेरित करना है। हालांकि पहले उन्होंने छह घंटे की रन के लिए ही रजिस्ट्रेशन कराया था और इस टारगेट को पूरा करने के बाद ट्रैक पर मौजूद डॉक्टर से उन्होंने और छह घंटे दौड़ने की इजाजत मांगी। जांच हुई जिसमें वे फिट पाए गए और अनुमति मिल गई। इस बार फिर वे इस दौड़ का हिस्सा बन रहे हैं। इनकी तरह और भी धावक हैं, जो 50 साल की उम्र पार करने के बाद भी 12 घंटे दौड़ने वाले हैं।

शहर में 18 अगस्त को होने वाली तिरंगा रन में यूं तो कई लोग 12 घंटे लगातार दौड़ने वाले हैं, मगर इसमें सात धावक वे हैं जिनकी उम्र 50 पार है। इनमें से छह धावक इंदौर और एक भोपाल के हैं। देशप्रेम के साथ सेहत से प्यार करने का संदेश देने के लिए इंदौर सुपर चाजर्स द्वारा तिरंगा रन आयोजित की जा रही है। दो, तीन, चार, छह और 12 घंटे की यह तिरंगा रन देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के ग्राउंड में होगी।

70 किमी का टारगेट

इस रन में 50 वर्ष की उम्र पार कर 12 घंटे तक सतत्‌ दौड़ने वालों में शहर से श्रीनिवास सिंह, गणपत फिरोदा, डॉ. योगेंद्र व्यास, प्रेम दुआ, सुभाष मसीह और जीडी शर्मा शामिल हैं, जबकि डॉ.बालाकृष्णन भोपाल से आ रहे हैं। 63 वर्षीय फिरोदा का लक्ष्य 12 घंटे में 70 किमी से अधिक दौड़ने का है। नियमित रूप से दौड़ और साइकिलिंग करने वाले फिरोदा दो वर्ष से दौड़ लगा रहे हैं। वे बताते हैं कि बेटे को दौड़ते हुए देखा तो मैंने भी दौड़ना शुरू कर दिया। इस दौड़ के जरिए एक नया टारगेट तो पूरा होगा ही साथ यही यह भी जान सकूंगा कि लंबे वक्त तक और लंबी दूरी तक दौड़ने में क्या परेशानियां आती हैं, जिसके आधार पर फुल मैराथन में मैं भाग ले सकूंगा।

मिली अस्थमा और हाई ब्लड प्रेशर से निजात

डॉ. योगेंद्र व्यास 56 वर्ष की उम्र में 80 किमी दौड़ने का टारगेट लेकर तैयारी कर रहे हैं। 12 घंटे दौड़ने का इनका यह तीसरा प्रयास है। वे बताते हैं कि पिछले दो वर्षों में वे 68 किमी दौड़ पाए, इसलिए इस बार टारगेट और ज्यादा का तय किया है। वे बताते हैं कि उन्हें अस्थमा और हाई ब्लड प्रेशर हो गया था। इसके बाद दौड़ना शुरू किया। पिछले छह वर्षों से प्रतिदिन दौड़ लगा रहा हूं। दौड़ने से दोनों ही रोगों से निजात मिल गई। मैं नंगे पैर दौड़ना पसंद करता हूं, क्योंकि इसमें मुझे आसानी भी होती है।

दोबारा शुरू हुआ वही सिलसिला

मैं कॉलेज के दिनों में भी दौड़ता था, मगर स्लिप डिस्क, घुटने का ऑपरेशन होने से दौड़ना छूट गया था। 25 साल बाद फिर हिम्मत की और दौड़ना शुरू हुआ। अब पिछले चार वर्षों से दौड़ना जारी है। यह कहना है 51 वर्षीय सुभाष मसीह का, जो इस बार तिरंगा रन में 80 किमी से अधिक दौड़ने का लक्ष्य लिए तैयारी कर रहे हैं। वे बताते हैं कि दौड़ना शारीरिक श्रम है, वहीं दौड़ को पूरा करना मन पर निर्भर करता है। दोबारा शुरू हुई कोशिश इसी का उदाहरण है।

मैंने दौड़ना शुरू कर दिया

सीए प्रेम दुआ की उम्र 50 वर्ष 3 माह है और वे 12 घंटे दौड़ने की तैयारी कर रहे हैं। इसके साथ ही उनकी कोशिश है कि कम से कम 60 किमी तो दौड़ लिया जाए। वे बताते हैं कि सात साल पहले डॉक्टर ने उन्हें एंजियोग्राफी कराने को कहा था और सलाह दी थी कि थोड़ा व्यायाम भी करें। मैंने पहले टहलना और फिर दौड़ लगाना शुरू कर दी। हर रोज 7-8 किमी दौड़ता हूं, ताकि खुद भी स्वस्थ रहूं और दूसरों को भी प्रेरित कर सकूं। धावक का मानसिक रूप से मजबूत होना जरूरी है।

पहले खुद को मैदान में उतरना होगा

प्रो. जीडी शर्मा अपनी सेहत के प्रति बचपन से ही जागरूक हैं और यही वजह है कि 57 साल की उम्र में भी वे इस तिरंगा रन में भाग ले रहे हैं। शर्मा बताते हैं कि अब तक वे दो बार मुंबई में फुल मैराथन और कई हाफ मैराथन में हिस्सा ले चुके हैं। इस तिरंगा रन में 12 घंटे में कम से कम 60 किमी दौड़ने का लक्ष्य रखा है। इनका मानना है कि सेहत के प्रति औरों को जागरूक करने से पहले खुद को मैदान में उतरना होगा।