इंदौर, नईदुनिया रिपोर्टर। बात 2016 की है। मैं अपने एक फ्रेंड सुदीप के साथ एक फिल्म देखने गया था। हम लोग 10-15 मिनट पहले पहुंच गए थे, इसलिए बातों-बातों में मैं उसे उस किताब के बारे में बताने लगा जो मैंने उन दिनों पढ़ी थी। सुदीप को मेरा ये अंदाज इतना रास आया कि उसने मुझसे कहा कि तुम अपनी आवाज में किताबों, कहानियों और उपन्यासों का सार रिकॉर्ड कर लोगों को वाट्सएप क्यों नहीं करते। मुझे बात जम गई और इस तरह शुरू हुआ बतौर 'बुकलेट गाय' मेरी जिंदगी का बिलकुल नया सफर। ये कहना है महाराष्ट्र के कहानीकार अमृत देशमुख का। जिन्हें लोग 'बुकलेट गाय' के नाम से जानते हैं। संस्था 'मुक्त संवाद' के कार्यक्रम में शिरकत करने शहर आ रहे अमृत ने नईदुनिया से खास गुफ्तगू में बताया कि सुदीप की सलाह पर जब मैंने पहली बार दस दोस्तों को करीब 20 मिनट की किताब की समरी रिकॉर्ड कर भेजी तो बहुत कमाल का रिस्पांस मिला। चंद वर्षों में मुझे सुनने वालों की तादाद लाखों में पहुंच गई है। मैं हर किसी को सलाह देता हूं कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में पढ़ने के लिए हर तरह का मैटर उपलब्ध है।

ऐसे में आपको बहुत सिलेक्टिव और चूजी होकर ऐसा बेहतर साहित्य और किताबें पढ़नी चाहिए, जो आपके व्यक्तित्व को सलीके से गढ़ने में सहायक हों। अगर आप ऐसा नहीं कर पा रहे हैं तो मुझे उस किताब का नाम बताएं, मैं उसे पढ़कर, संक्षेप में उसका सार आप तक पहुंचाने की हरमुमकिन कोशिश करूंगा।

संजीदगी से करनी पड़ती है तैयारी

दो सौ, ढाई सौ पेज की किसी किताब के जीस्ट को लोगों तक इस तरह पहुंचाना कि वो उन्हें बोरिंग भी न लगे, उनका ज्यादा वक्त भी जाया न हो और वो किताब के सारे अहम बिंदुओं से वाकिफ भी हो जाए, ऐसा करना आसान नहीं है। इसके लिए बहुत तैयारी करनी पड़ती है। सबसे पहले तो किताब को इस तरह पढ़ना पड़ता है कि आप उसकी हर खूबी से वाकिफ हो जाएं। इसके बाद उसके जीस्ट के नोट्स बनाने पड़ते हैं और फिर बहुत सी बातों को ध्यान में रखते हुए नोट्स की सख्ती से एडिटिंग करनी पड़ती है।

इसके बाद तैयार सार को रिकॉर्ड कर लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी पड़ती है। इस क्रम में मैं अब तक करीब 1350 किताबें पढ़ चुका हूं। जिनमें से 600 के टेक्स्ट फार्म भी मैंने तैयार कर लिए हैं। तीन साल में करीब 200 किताबों का जीस्ट रिकॉर्ड कर सर्कुलेट कर चुका हूं।

Posted By: Nai Dunia News Network