Indore News: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिंदगी इतनी सस्ती भी नहीं कि एक विदेशी भाषा न आने के कारण इसे खत्म कर लिया जाए। वह भी तब, जब इसे थोड़ी मेहनत के साथ सीखा जा सकता है। इंदौर के न्यू गौरीनगर की 18 वर्षीय शैल कुमारी (खुशी) ने ऐसी ही नादानी की। एयर होस्टेस बनने की तैयारी कर रही थी, लेकिन कमजोर इंग्लिश के कारण वह खुद को इंटरव्यू में असफल मान बैठी थी। इसीलिए इंटरव्यू से पहले ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस तरह उसने न केवल खुद का, बल्कि पूरे हो सकने वाले सपने का भी गला घोंट दिया।

दरअसल, शैल कुमारी का सपना एयर होस्टेस बनने का था। इसके लिए वह तैयारी कर रही थी, लेकिन उसकी इंग्लिश कमजोर थी। वह यह बात जानती थी, इसीलिए उसने अपनी अंग्रेजी बेहतर करने के लिए एमजी रोड पर एक कोचिंग क्लास ज्वाइन कर ली। इस बीच विमान कंपनी ने इंटरव्यू की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। उसे यह आत्मविश्वास नहीं था कि इंग्लिश में वह ठीक से जवाब दे पाएगी। अपनी इसी कमजोरी का उसने तनाव पाल लिया।

छोटी बहन ने समझाया था- डरने की जरूरत नहीं है

शनिवार को हाउस इंटरव्यू था, जबकि 30 नवंबर को एयर लाइंस कंपनी इंटरव्यू के लिए आने वाली थी। शुक्रवार को रात करीब 10.30 बजे शैल ने छोटी बहन पलक से इस संबंध में बात की। शैल ने कहा कि अंग्रेजी बहुत कठिन है, इंटरव्यू में कैसे जवाब दे पाऊंगी। इस पर पलक ने समझाया कि अंग्रेजी से इतना डरने की जरूरत नहीं है। पढ़ाई करने से अंग्रेजी सुधर जाएगी। इसके बाद वह कमरे में चली गई। बाद में मां के आवाज लगाने पर पलक तो ऊपर के कमरे से नीचे आ गई लेकिन शैल की तरफ से जवाब नहीं आया। वह फांसी लगा चुकी थी।

बेटी के लिए पिता ने लिया था चार लाख का लोन

शैल के पिता संतोष बैस का फायर सेफ्टी उपकरणों का कारोबार है। उनकी तीन बेटियां हैं। सबसे बड़ी बेटी मुस्कान है जो शैल कुमारी के साथ एयर होस्टेस की कोचिंग कर रही है। दूसरे नंबर पर शैल कुमारी और सबसे छोटी पलक है। संतोष ने बेटी की इच्छा पूरी करने के लिए लोन लेकर चार लाख रुपये जमा किए थे। 15 जून को ही उसने कोचिंग जाना शुरू किया था। शैल कुमारी की स्कूली शिक्षा गौरीनगर के हायर सेकंरी स्कूल से हुई थी। इस कारण शुरुआत से अंग्रेजी में कमजोर थी। पलक उसे अंग्रेजी सिखाने के लिए एमआर-10 स्थित एक कोचिंग सेंटर पर भी ले गई। दो दिन डेमो लेने के बाद उसने आने की हामी भर दी। इसी बीच उसके इंटरव्यू का वक्त आ गया।

शैल काश! तुम इंग्लिश-विंग्लिश की शशि से सीख लेती

वर्ष 2012 में एक फिल्म आई थी... इंग्लिश-विंग्लिश। इसमें ख्यात अभिनेत्री श्रीदेवी ने शशि नाम की एक ऐसी महिला की भूमिका निभाई थी जो इंग्लिश नहीं जानती थी। इस बात पर उसका पति और बेटी उसका मजाक उड़ाते थे। शशि इस कमजोरी को दूर करने के लिए ठान लेती है। वह अंग्रेजी बोलना सिखाने की क्लास में दाखिला लेती है। उसका समर्पण और मेहनत रंग लाती है और कुछ दिन में वह अंग्रेजी बोलना सीख जाती है। यह देखकर उसका पति और बेटी भी हतप्रभ रह जाते हैं। सबकी नजरों में उसका सम्मान बढ़ जाता है। शशि तो अधेड़ महिला थी, जबकि इंदौर के न्यू गौरी नगर की शैल तो मात्र 18 वर्ष की थी। उसके सामने तो अभी लंबी जिंदगी थी। वह चाहती तो मेहनत करके इंग्लिश सीख सकती थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।

अंग्रेजी केवल भाषा, ज्ञान नहीं

करियर काउंसलर एवं इमोशनल-सोशल इंटेलीजेंस विशेषज्ञ डा. संदीप अत्रे का कहना है कि विद्यार्थियों को यह समझना होगा कि अंग्रेजी सिर्फ एक भाषा है, वह ज्ञान नहीं है। सिर्फ अंग्रेजी की वजह से सिलेक्शन और रिजेक्शन नहीं होता। भाषा सिर्फ सामने नजर आने वाली वजह बन जाती है। दुनिया में हजारों उदाहरण हैं, जो अंग्रेजी नहीं जानते, लेकिन सफल हैं। अंग्रेजी न आने पर ज्यादा ध्यान देने के बजाय हम जो काम कर रहे हैं उस पर इतना ध्यान दिया जाए कि किसी का ध्यान कमजोरी पर न जाए।

Posted By: Hemraj Yadav

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