Indore News: हर्षल सिंह राठौड़, इंदौर (नईदुनिया)। गुलाबी शहर जयपुर की तरह अब इंदौर के मुख्य बाजार की रंगत भी एक जैसी होगी। यहां के बाजार को भी एक रंग से सजा हुआ लोग देख सकेंगे। यहां केवल ऐतिहासिक इमारत राजवाड़ा को संवारने का कार्य ही नहीं किया जा रहा, बल्कि आसपास लगने वाली दुकानों पर भी नई रंगत नजर आने लगी है। लकड़ी की सुंदर नक्काशी वाले सात मंजिला राजवाड़ा की तरह अब यहां की दुकानों की सूरत भी एकरूपता लिए होगी।

यह कार्य नगर निगम और जन सहयोग से किया जा रहा है। शुरुआत मल्हारी मार्तंड मंदिर के सामने बनी दुकानों से हो गई है। यहां के साइन बोर्ड अब समान रंग और समान चौड़ाई वाले होंगे। फिर चाहे दुकान किसी भी उत्पाद की हो, बोर्ड एक से नजर आएंगे। प्रयास किया जा रहा है कि जनवरी में होने वाले प्रवासी भारतीय सम्मेलन के पूर्व यहां के बोर्ड में एकरूपता आ जाए। खास बात यह है कि यह रंग संयोजन केवल राजवाड़ा क्षेत्र की दुकानों तक ही सीमित नहीं, बल्कि कृष्णपुरा पुल से बड़ा गणपति तक की दुकानों पर करने की योजना है।

लकड़ी जैसे होंगे साइन बोर्ड - स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा राजवाड़ा के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है जो अब अंतिम चरण में है। राजवाड़ा की ऊपरी मंजिलें लकड़ी से बनी हैं, इसलिए क्षेत्र की दुकानों के साइन बोर्ड भी अब उसी रंग संयोजन के आधार पर तैयार हो रहे हैं। बेशक यह साइन बोर्ड लकड़ी के नहीं होंगे, लेकिन इनका रंगरोगन उसी तरह किया गया है जैसे राजवाड़ा का है। इसका लाभ यह होगा कि शहर के बाजार की पहचान में अब एक और खूबी जुड़ जाएगी।

जन सहयोग से हो रहा कार्य - स्मार्ट सिटी कंपनी के अधीक्षण यंत्री डीआर लोधी के अनुसार, साइन बोर्ड को एक जैसा करने का कार्य कंपनी और जन सहयोग से किया जा रहा है। इसमें दुकानदारों की भी सहमति है। एकरूपता के लिए बोर्ड का आकार भी तय किया गया है। बोर्ड की ऊंचाई 1.2 मीटर से अधिक नहीं हो सकती, जबकि लंबाई दुकान के आकार के अनुरूप रखी जा सकती है। यह बोर्ड किसी भी मटेरियल से बनाए जा सकते हैं पर रंग समान ही रखना होगा। इस प्रयास का उद्देश्य यही है कि दुकानों का रूप भी राजवाड़ा की तरह प्राचीन नजर आए।

400 दुकानें होंगी एक जैसी - बड़ा गणपति से कृष्णपुरा पुल तक की दुकानों पर यह कार्य होना है। एमजी रोड के इस हिस्से में करीब 400 दुकानें पंजीकृत हैं। तीन माह में यह कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन कई दुकानें अभी भी दुरुस्त नहीं हुई हैं और वहां निर्माण कार्य जारी है। ऐसे में उनके पूरा होने पर ही बोर्ड लगाए जा सकेंगे। चूंकि यह कार्य जन सहयोग से हो रहा है, इसलिए व्यापारियों पर वक्त का दबाव भी नहीं डाला जा सकता।

शिवाजीराव होलकर ने बनवाया था बाजार - इतिहासकार गणेश मतकर के संग्रह से उनके बेटे सुनील मतकर ने बताया कि वर्तमान में राजवाड़ा के आसपास जैसा बाजार है, वह पहले नहीं था। आज जहां रानी सराय है वहां किसी दौर में मीना बाजार लगा करता था। खरीदारी के प्रति लोगों को आकर्षित करने के लिए होलकर शासक और परिवार के सदस्य वहां खुद खरीदारी करने जाया करते थे। लोगों को जब यह बाजार दूर लगने लगा तो शिवाजीराव होलकर ने राजवाड़ा के आसपास बाजार लगाने की अनुमति दी। तब खजूरी बाजार, बर्तन बाजार, सराफा बाजार हुआ करते थे। राजवाड़ा राज परिवार का रिहायशी क्षेत्र था। देश की स्वतंत्रता के बाद जब राज परिवार की दखलअंदाजी खत्म हुई तब यहां बाजार ने आकार लिया।

Posted By: Hemraj Yadav

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