Indore News : इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा देने वाला हाईप्रोफाइल केस पुलिस के गले की हड्डी बन गया है। पांच एसपी बदल गए, लेकिन चार साल से मालखाना में रखी इस प्रकरण की केस डायरी को देखने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा। टीआइ और एसआइ भी जांच के नाम रोजनामचे में ही पर्ची काट कर नौकरी बचा रहे हैं। उधर अधिकारी और नेताओं के नाम से मौज लूटने वाली (आरोपित) जमानत लेकर बाहर चली गई है।

मई 2018 में सदर बाजार पुलिस ने पुलिस आफिसर्स मैस से एक युवती को गिरफ्तार किया था। तत्कालीन एडीजी अजय शर्मा की बहन बनकर आइजी पवन श्रीवास्तव की पार्टी में खाना खा रही थी। जांच में पता चला कि सोनिया शर्मा नामक यह युवती एडीजी की बहन नहीं, बल्कि किन्नर है और पूरे पुलिस महकमे में दीदी के नाम से जानी जाती है। सोनिया न सिर्फ पुलिस आफिसर्स मेस में ठहरती थी, अपितु पुलिस लाइन से मिली सरकारी जीप में ही घूमती थी। सीएसपी, टीआइ और एसपी स्तर के अफसर तो उससे मिलने का इंतजार करते थे। सोनिया न सिर्फ मेहमाननवाजी करवाती थी अपितु थाना प्रभारियों की पदस्थापना भी उसके फोन से ही हो जाती थी। सोनिया को जमानत तो मिल गई, लेकिन चालान आज तक नहीं लगा। पुलिस (विवेचक) की मजबूरी यह कि जिन एडीजी शर्मा की बहन बनी, उनसे कौन सवाल करे। सोनिया एडीजी से संपर्क में थी और उसका बंगले पर आना-जाना था। वह एडीजी श्रीवास्तव के संपर्क में भी थी, लेकिन उनसे भी टीआइ-एसआइ सवाल (बयान) नहीं कर रहे हैं।

बहन एडीजी की बनी पर रिपोर्ट एसआइ से लिखवाई - पुलिस ने सोनिया को प्रेमी कृष्णा के साथ गिरफ्तार किया तो स्पष्ट हो गया कि उसने एडीजी अजय शर्मा के नाम का दुरुपयोग किया है। कायदे से पुलिस एडीजी के आवेदन पर ही एफआइआर दर्ज करती, लेकिन यहां भी अफसरों के डर के कारण एसआइ एसएस निंगवाल को फरियादी बनाया गया। सोनिया ने कमजोर विवेचना का फायदा उठाया और आसानी से जमानत करवा ली।

टीआइ से बुके मांगने में फंस गई थी सोनिया - यूं तो सोनिया कई थाना प्रभारियों के संपर्क में थी और उसके एक फोन पर थाना प्रभारी कुर्सी छोड़ देते थे, लेकिन उस समय पलासिया थाना प्रभारी रहे धैर्यशील येवले से नोकझोंक महंगी पड़ गई। सोनिया ने एक समारोह में जाने के लिए येवले से बुके मांगा और बहस हो गई। गुस्से में येवले ने एडीजी को काल कर दिया और सोनिया की पोल खुल गई। गिरफ्तारी में शामिल महिला सीएसपी ज्योति उमठ व टीआइ को विवेचक ने बयान लेने बुलाया, लेकिन उन्होंने आने से इन्कार कर दिया। टीआइ सुनील श्रीवास्तव के अनुसार केस की विवेचना चल रही है। तकनीकी साक्ष्यों के कारण चालान अटका हुआ है।

आरआइ-एमटीओ को निपटा कर बच गए अफसर - पुलिस मुख्यालय ने मामले में जांच बैठाई तो अफसरों ने आरआइ अनिल राय व एमटीओ को 'दीदी" को सरकारी गाड़ी मुहैया करवाने के आरोप में निलंबित कर दिया, लेकिन उन थाना प्रभारी और सीएसपी से पूछताछ भी नहीं की, जिन्होंने मनमाफिक पदस्थापना करवाई। संयोगितागंज थाने में पदस्थ रहे एक टीआइ तो दीदी से घंटों बात करते थे।

परीक्षण करवाएंगे - इंदौर के पुलिस आयुक्त हरिनारायणाचारी मिश्र का कहना है कि इस प्रकरण का चालान क्यों लंबित है, इस बारे में परीक्षण कराया जाएगा। शीघ्र ही प्रकरण का निराकरण करवाया जाएगा।

Posted By: Hemraj Yadav

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