इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। पेट में मरा बच्चा लिए ऋषि नगर की महिला घंटों एमवाय अस्पताल में भटकती रही, लेकिन उसे भर्ती तक नहीं किया गया। मामला मीडिया तक पहुंचा तो अस्पताल प्रबंधन ने महिला को प्रसूति विभाग में भर्ती कराया। देर रात तक उसका इलाज जारी था। मामला ऋषि नगर निवासी रेखा पति देवेंद्र का है। उसे 18 सप्ताह का गर्भ था। महिला की सोनोग्राफी जांच में पता चला कि बच्चा गर्भ में ही मर चुका है। इस पर परिजन गुरुवार दोपहर करीब दो बजे उसे एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे।

उन्होंने रेखा को भर्ती कराने की कोशिश की लेकिन न डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, न स्टाफ ने सुध ली। महिला पेट में मरा बच्चा लिए प्रसूति और स्त्री रोग विभाग में भटकती रही। मामला मीडिया तक पहुंचा, तब अस्पताल प्रबंधन ने ताबड़तोड़ महिला को डॉ. हेमलता झरबड़े की यूनिट में भर्ती कराया। देर रात तक महिला का इलाज चल रहा था। परिजन राजेश ने बताया कि हम मरीज को भर्ती कराने के लिए पूरे अस्पताल में भटकते रहे लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। सोनोग्राफी में ही पता चल गया था कि बच्चे की गर्भ में मौत हो चुकी है।

गर्भपात की कोशिश

महिला करीब ढाई बजे हमारे पास आई थी। ऐसे मामलों में सामान्य तरीके से गर्भपात कराने की कोशिश की जाती है। भ्रांति रहती है कि बच्चा पेट में मर जाए तो गर्भवती के शरीर में जहर फैल जाता है लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता। महिला को भर्ती करने में थोड़ी देर हुई थी। -डॉ. हेमलता झरबड़े

तुरंत भर्ती कराया

जैसे ही मुझे पता चला कि गर्भवती महिला को भर्ती नहीं किया जा रहा है मैंने डॉक्टरों को इस संबंध में निर्देश दिए और महिला को भर्ती कराया। डॉक्टरों को हिदायत दी है कि किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतें। -डॉ. पीएस ठाकुर, अधीक्षक एमवाय अस्पताल, इंदौर