इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। वर्ष 1861 से चले आ रहे उर्दू और फारसी शब्दों पर जल्द ही प्रतिबंध लग जाएगा। लिखा-पढ़ी और पुलिस प्रचलन के इन शब्दों के स्थान पर हिंदी शब्दों का प्रयोग होगा। पुलिस मुख्यालय से मिले पत्र के बाद पुलिस कमिश्नर हरिनारायणाचारी मिश्र ने करीब 383 उर्दू और फारसी शब्दों के स्थान पर हिंदू शब्द उपयोग करने की सूची तैयार की है।

कानून व्यवस्था की समीक्षा के दौरान पिछले दिनों एक पुलिस अफसर ने लापता बच्चों के आंकड़े पेश करते हुए कहा था कि पुलिस ने सैकड़ों बच्चों को दस्तयाब करने में सफलता हासिल की है, तो मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान चौंक गए। उन्होंने तुरंत उस अफसर को टोका और कहा कि यह दस्तयाब क्या होता है। ऐसे कठिन शब्दों के स्थान पर कुछ आसान शब्दों का प्रयोग क्यों नहीं होता। रिसर्च एंड डेवलपमेंट एडीजी अनिल कुमार गुप्ता ने 18 जनवरी को सभी एसपी, डीआइजी, आइजी, एडीजी को पत्र लिखकर उर्दू व फारसी (गैर हिंदी) शब्दों के स्थान पर हिंदी शब्दों का सुझाव मांग लिया। इंदौर पुलिस कमिश्नर हरिनारायणाचारी मिश्र ने करीब 383 शब्दों की सूची बनाई जो जल्द ही प्रचलन में आना शुरु होगी।

इन शब्दों पर लगेगा प्रतिबंध

- खयानतः हड़पना - ( स्वयं की वस्तु दूसरों को सुरक्षित रखने के लिए दी जाए और वह उसे वापस न करे)

- गोसवाराः नक्शा - (माह के अंत में प्रार्थना पत्र के निस्तारण व शेष की संख्यात्मक बनाई जाने वाली जानकारी)

- रंजिशः दुश्मनी ( पुराना विवाद जिसे लेकर हमला होता है।)

- मुचलकाः बंद पत्र ( पुलिस बंदपत्र के माध्यम से कार्रवाई करती है।

- इनके अलावा भी अदम पैरवी ( बिना देखरेख), अदम मौजूदगी (बिना उपस्थिति),अपील कुनंदा (याचनाकर्ता), अहकाम ( महत्वपूर्ण), इंद्राज (अंकन), गंदुम (गेहुआं), सफा चौहरम (रजिस्टर नंबर-8 का आधा भाग), चाराजोई (न्यायालय में पक्ष रखना), तनकी (परीक्षण), दीगर (दूसरा), नकबजनी (सेंध), फर्द अफराद (एक व्यक्ति), माल-मश्रुता (लूट व चोरी का बरामद सामान), मुजरिम (अपराधी), अकमब (पीछे), कलमबंद (बयान लिखना), खाना तलाशी (घर इत्यादि में तलाशना), सजायाफ्ता (सजा काट चुका), चश्मदीद (आंखों देखा), तहरीर (लेखा), तलब (बुलाना), ताल्लुक (संबंध), दस्तखत (हथियार) जैसे 383 शब्द है, जिनके स्थान पर हिंदी शब्दों का चयन होना है।

Posted By: Hemraj Yadav

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