इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में लाइसेंस की व्यवस्था में बदलाव का लाभ आमजन को भी मिलने लगा है। दरअसल आधार कार्ड के डेटा का उपयोग इसमें होने से अब कार्यालय में आवेदक का बायोमैट्रिक निशान नहीं लिया जा रहा है। इससे आवेदकों का समय बच रहा है। हर लाइसेंस के निर्माण पर करीब चार मिनट तक का समय बच रहा है।

क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में पहले लाइसेंस की व्यवस्था स्मार्ट चिप कंपनी के पास थी, लेकिन अब यह पूरी व्यवस्था केन्द्र सरकार के सारथी सर्वर पर चली गई है। इसे आधार कार्ड से जोड़ा गया है। नई व्यवस्था मेंआवेदक को लर्निंग लाइसेंस बनवाते ही अपना आधार नंबर डालना होता है। इसके बाद आवेदक की पूरी जानकारी आ जाती है। यही आवेदक जब पक्के लाइसेंस के ट्रायल देने के लिए आता है तो यहां भी उसका आधार नंबर डालते ही पूरी जानकारी आ जाती है। इसके बाद उसके बायोमैट्रिक निशान नहीं लिए जाते हैं। केवल डिजिटल सिग्नेचर और फोटो खींच कर उसे भेज दिया जाता है।

अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी अर्चना मिश्रा ने बताया कि इससे आवेदकों का समय बचने लगा है। पहले की व्यवस्था में सफल परीक्षण देने वाले आवेदक को पहले बायोमैट्रिक निशान देने होते थे। सबसे अधिक समय इसमें ही लगता था। दोनों हाथों के निशान देने के दौरान अगर सर्वर में दिक्कत आती थी तो परेशानी बढ़ जाती थी। यह डाटा सेव ही नहीं होता था। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद बाद आवेदक का फोटो और डिजिटल सिग्नेचर होते थे।

इस पूरी प्रक्रिया में करीब 5 मिनट प्रति आवेदक तक लग जाते थे। यहीं समय घट कर अब 1 से डेढ़ मिनट हो गया है। हम लोग आवेदक के फोटो ट्रैक पर ही कर ले रहे हैं। इससे भी संख्या बढ़ गई है। पहले जहां रोजाना 250 लाइसेंस बन रहे थे, वहीं अब यह संख्या 400 तक पहुंच रही है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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