गजेन्द्र विश्वकर्मा, इंदौर। श्री गोविंदराम सेकसरिया प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान (एसजीएसआइटीएस) ने कार डिजाइन के मामले में देशभर के 185 इंजीनियरिंग कालेजों (इनमें कई एनआइटी भी शामिल) को पछाड़ दिया है। सोसाइटी आफ आटोमोटिव इंजीनियर्स (एसएई) ने संस्थान की कार की डिजाइन को सर्वश्रेष्ठ माना है। 14 से 19 फरवरी तक होने जा रही देश के सबसे बड़े आल टरेन व्हीकल (एटीवी) प्रतियोगिता के लिए कम से कम लागत में मजबूत डिजाइन और मैकनिज्म संस्थान ने तैयार किया है। कार की गति बढ़ाने के लिए गियर बाक्स की डिजाइन भी बदल दी है।

कार में फोर व्हील ड्राइव तकनीक का उपयोग किया गया है। इससे स्टीयरिंग को आगे और पीछे के दोनों पहियों को जोड़ा गया है। इससे कार पूरी तरह ड्राइवर के हाथों पर नियंत्रित रहेगी। आटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन आफ इंडिया (एआरएआइ) के पैमानों पर भी कार खरी उतरी है।

कार की मजबूती के लिए वेल्डिंग की गुणवत्ता बढ़ाई

मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रो. डा. जीडी ठकार कार बनाने वाली टीम के फैकल्टी एडवाइजर है। उन्होंने बताया कि इस बार डिजाइन में हमने बदलाव किया है। मजबूती में मैकेनिज्म की वेल्डिंग गुणवत्ता बहुत मायने रखती है। इसके लिए हमने संस्थान से पासआउट 35 वर्ष के अनुभवी पूर्व विद्यार्थी धीरज पाल की सहायता ली।

नवाचार की बदौलत 15 लाख रुपये जीते

गियर बाक्स की डिजाइन बदलने से कार की गति 10 किलोमीटर प्रतिघंटा बढ़ गई है। अब तक कार की ज्यादातर गति 40 किलोमीटर प्रति घंटा होती थी, जो 50 किलोमीटर प्रति घंटा हो गई है। बाहा इंडिया कमेटी द्वारा विजेता टीमों को 40 लाख रुपये तक के नगद पुरस्कार दिए जाते हैं। 2007 से संस्थान अपनी कार प्रस्तुत करता रहा है और 15 लाख रुपये से ज्यादा के नगर पुरस्कार जीत चुका है।

पूर्व विद्यार्थियों ने की आर्थिक मदद

एसजीएसआइटीएस टीम की कार बनकर तैयार हो गई है। इसका रेवती रेंज पर कुछ दिनों में ट्रायल किया जाएगा। इस वर्ष संस्थान ने 3.5 लाख रुपये में कार तैयार की है, जबकि पिछले सालों में करीब पांच लाख रुपये तक खर्च होते थे। राशि पूर्व विद्यार्थियों, एलुमिनाई एसोसिएशन और कुछ उद्योगों ने विद्यार्थियों को दी है। प्रतियोगिता 15 फरवरी से शुरू होगी। इसके एक दिन पहले 14 फरवरी को कार को नेटरेक्स ट्रैक पर पहुंचाया जाएगा।

आइआइटी ने इस बार भी बनाई दूरी

प्रतियोगिता मैकेनिकल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है। इसके बहाने विद्यार्थी वाहन बनाने की पूरी प्रक्रिया जान लेते हैं। कई आटोमोबाइल कंपनियों ऐसे विद्यार्थियों को नौकरी में वरीयता देती है। इसके बावजूद आइआइटी इंदौर की टीम वर्षों से इस प्रतियोगिता से दूरी बनाए हुए हैं।

Posted By: Prashant Pandey

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close