इंदौर। शादी समारोह में प्लेट में जूठन छोड़ने और प्लास्टिक के उपयोग के विरोध में अभियान चलाने के बाद अब लिफाफे में हजारों रुपए नेग देने का विरोध शुरू हो गया है। उपहार, नजराने या नेग के लिफाफे में सौ रुपए से ज्यादा नहीं रखने के विरोध में जोर-शोर से सामाजिक स्तर से अपील की जा रही है। एक सामाजिक संस्था के साथ-साथ सोशल मीडिया पर लिफाफे की अधिकतम राशि तय करने की मांग उठ रही है। जल्द ही समाज स्तर पर बड़ा बदलाव लाने के लिए रणनीति तैयार की जा रही है। इन दिनों विवाह समारोह का दौर जारी है। इंदौर जैसे शहर में जहां आपसी मेल-जोल की संस्कृति अभी भी जिंदा है, वहां एक व्यक्ति को महीनेभर में दस से बारह शादियों के निमंत्रण पत्र आते हैं। प्रत्येक लिफाफे में पांच सौ, एक हजार या दो हजार रुपए रखने से व्यक्ति पर काफी आर्थिक बोझ बढ़ जाता है।

शारीरिक तौर पर व्यक्ति एक या दो समारोहों में पहुंचता है। शेष स्थानों पर सिर्फ उपस्थिति दर्ज करवाने के लिए लिफाफा भेज देता है। इस परंपरा को रोकने के लिए सामाजिक संस्था 'विश्व बंधु संगठन' ने आव्हान किया है। प्रत्येक समाज के प्रमुख से मिलकर और सोशल नेटवर्किंग साइट के माध्यम से 100 रुपए नेग तय करने की अपील की जा रही है। कई समाजों ने इसके लिए सहमति देते हुए इस विचार पर अमल करना भी शुरू कर दिया है।

भेंट राशि संस्था को दान कर संस्था की रसीद घरों में भेज दी

विश्व बंधु संस्था के कमल गुप्ता कहते हैं कि पिछले दिनों बेटे की शादी में मना करने के बावजूद 200 लोगों ने जबरन लिफाफा दिया तो उसमें निकली करीब 1 लाख रुपए से अधिक की राशि महेश दृष्टिहीन कल्याण संघ में भेंट कर दी। लिफाफा देने वाले व्यक्ति के घर बाकायदा संस्था की रसीद काटकर भी पहुंचा दी।

समारोह का स्तर देखकर जाने से कतराते हैं लोग

वैश्य महासम्मेलन युवा इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष घनश्याम गुप्ता ने कहा कि आजकल शादी समारोहों के ज्यादा आलीशान होने से भी एक मध्यमवर्गीय व्यक्ति वहां उपहार देने के डर से जाने से ही कतराता है। कायदे से तो हम लेन-देन ही बंद करने की मांग कर रहे हैं लेकिन अगर नेग के तौर पर कोई देना ही चाहता है तो अधिकतम 100 रुपए तय कर दिए जाएं। इससे किसी को यह भी न लगेगा कि वे खाली हाथ चले गए। वैश्य समाज में कई परिवारों ने इसका पालन करना शुरू कर दिया है।

मुश्किल है पर बदलाव जरूरी

माहेश्वरी समाज के पुरुषोत्तम सोमानी और जैन समाज की संध्या जैन कहती हैं कि नेग की राशि व्यक्ति की आर्थिक परिस्थिति पर निर्भर है। व्यक्ति अपनी संपन्नाता दिखाने के लिए लिफाफे में ज्यादा राशि रखता है। इससे लेने वाले व्यक्ति पर भी अप्रत्यक्ष रूप से बोझ बढ़ता है। संबंधित के परिवार में समारोह होने पर कम से कम उतनी या उससे ज्यादा राशि लौटाने की चिंता रहती है। कई बार गुंजाइश नहीं होने के बावजूद लोग ज्यादा राशि देने को मजबूर होते हैं।

प्रत्येक समाज से कर रहे अपील

विश्वबंधु संगठन के अनुसार प्रत्येक सामाजिक संस्था से मिलकर इसकी अपील की जा रही है। प्रत्येक समाज द्वारा अपने-अपने समूहों में इस बात का प्रचार-प्रसार किया जाएगा तो बदलाव की शुरुआत होगी। छोटे स्तर पर ही सही, कई बुद्धिजीवियों ने शुरुआत कर दी है।

Posted By: Nai Dunia News Network