Indore Sports : कपीश दुबे, इंदौर (नईदुनिया)। मध्य प्रदेश के सभी खेल संगठनों को मप्र सरकार के खेल विभाग से मान्यता मिलती है। इसी मान्यता के सहारे उन्हें शासकीय मदद भी मिलती है। मगर इंदौर में अनोखा मामला सामने आया है, जहां जिला फुटबाल संगठन (डीएफए) ने खेल विभाग को ही 'मान्यता" निरस्त करने का नोटिस थमा दिया है। खेल विभाग की टीम को जिला स्पर्धा में खेलने से भी रोक दिया गया है।

नेहरू स्टेडियम में 23 से 30 नवंबर तक आयोजित स्पर्धा में शहर की 24 टीमें खेल रही हैं। खेल विभाग विभिन्न शहरों में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए अकादमी और डे-बोर्डिंग सेंटर संचालित करता है। इंदौर में खेल विभाग फुटबाल का डे-बोर्डिंग सेंटर संचालित करता है, जिसकी टीम विभिन्न स्पर्धाओं में खेलती है। शहर में इंदौर जिला फुटबाल संगठन (डीएफए) जिला स्पर्धा करवा रहा है, लेकिन इसमें हिस्सा लेने से खेल विभाग की टीम को रोक दिया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि गत दिनों शहर में एक अन्य संगठन द्वारा आयोजित स्पर्धा में भी डे-बोर्डिंग टीम ने हिस्सा लिया था। इससे डीएफए के पदाधिकारी नाराज हैं। जिला खेल अधिकारी रीना चौहान को नोटिस भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि आपकी टीम अनाधिकारिक संगठन द्वारा आयोजित स्पर्धा में खेली थी। यह अनुशासनहीनता है। इसके साथ ही खेल विभाग की टीम को स्पर्धा में हिस्सा लेने से रोक दिया गया है।

विभाग ने उखाड़ दिया गोल पोस्ट, स्पर्धा में एक दिन की देरी

डीएफए के सचिव लोकेंद्र वर्मा ने बताया कि हमारा टूर्नामेंट नेहरू स्टेडियम में 22 नवंबर से शुरू होना था। मगर खेल विभाग ने अपने गोल पोस्ट उखाड़ दिए। इसके कारण हमें नए गोल पोस्ट की व्यवस्था करनी पड़ी। टूर्नामेंट एक दिन की देरी से प्रारंभ हुआ। डे-बोर्डिंग सेंटर टीम और इसके कोच संदीप बारोड के अनाधिकारिक संगठन की गतिविधियों में शामिल होने के संबंध में हम पहले भी विभाग को सूचित करते रहे हैं। जिस संगठन को खेल विभाग से मान्यता नहीं है, उसमें वह अपनी टीम कैसे खेलने भेज सकते हैं। फिलहाल इन्हें टूर्नामेंट में खेलने से रोका गया है। यदि नोटिस का संतोषप्रद जवाब नहीं आता है तो उनकी मान्यता संगठन से निरस्त हो जाएगी।

यह है खींचतान की असली वजह

शहर में फुटबाल संघ को लेकर दो गुटो में खींचतान चल रही है। मप्र फुटबाल संघ से मान्यता जिला फुटबाल संघ (डीएफए) को है, जिसकी कमान कांग्रेस नेता पिंटू जोशी के हाथ है। मगर संगठन की कार्यशैली से नाखुश इंदौर और महू के क्लबों ने इंदौर फुटबाल संघ नाम से अपना अलग संगठन बना लिया है। इसकी कमान भाजपा नेता जीतू जिराती के पास है। इसे मप्र ओलिंपिक संघ का भी समर्थन है। गत दिनों इसी संगठन के टूर्नामेंट में खेल विभाग के डे-बोर्डिंग सेंटर की टीम खेली थी। डीएफए ने घोषणा की है कि जो भी समानांतर संगठन से खेलेगा, उसकी मान्यता निरस्त कर किसी टूर्नामेंट में खेलने नहीं देंगे।

खिलाड़ियों को निशाना बनाना गलत

जिला खेल अधिकारी रीना चौहान का कहना है कि शहर के खिलाड़ी किसी टूर्नामेंट में खेलने जाते हैं तो यह उनका फैसला है। जो बच्चे खेले थे, वह डे-बोर्डिंग की स्कीम से बाहर के थे। वह यहां नियमित अभ्यास करते हैं। पदाधिकारी फुटबाल संगठन की राजनीतिक खींचतान के चलते खिलाड़ियों को निशाना बना रहे हैं, जो गलत है। यह किसी तरह से खिलाड़ियों का विकास कर रहे हैं।

Posted By: Hemraj Yadav

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