International Sign Language Day देवेंद्र मीणा, इंदौर। स्वच्छता की तरह देश में मूक-बधिरों की मदद के लिए भी इंदौर की पहचान बनी है। बीस साल पहले तुकोगंज थाना क्षेत्र में शुरू हुए सहायता केंद्र में देशभर के मूक-बधिर संपर्क करते हैं। केंद्र की सहायता से मूक-बधिरों के साथ दुष्कर्म के 300 से ज्यादा मामलों में सजा हो चुकी है। देशभर से करीब 2700 सहायता आवेदन इस केंद्र को मिले हैं। इंदौर में ही देश का पहला मूक-बधिर अनाथालय अरबिंदो अस्पताल के पीछे तैयार हुआ है। 25 सितंबर को इसका उद्घाटन होगा। फिलहाल यहां पांच बालक और 70 बालिकाएं रहेंगे। इसकी क्षमता 100 बेड की है।

आनंद सर्विस सोसायटी के ज्ञानेंद्र पुरोहित ने बताया कि साल 2002 में मूक-बधिरों के लिए सहायता केंद्र खोला गया था। मुंबई, दिल्ली, पुणे आदि कई जगहों से मूक-बधिर मदद के लिए फोन करते हैं। उन्हें उनके शहर में तुरंत मदद उपलब्ध करवाई जाती है। यह देखने में आया था कि मूक-बधिर बच्चों के रहने के लिए कोई स्थान नहीं है। ऐसे में देश का पहला अनाथालय इंदौर में बनाया गया है। कोशिश है कि पूरा महिला स्टाफ रहेगा। आने वाले दिनों में इसकी क्षमता 150 बेड की करेंगे। अनाथ हो चुके मूक-बधिरों को रखने के लिए विभिन्ना राज्यों से संपर्क किया जा रहा है। इसके लिए किशोर न्याय अधिनियम के तहत आदेश भी लगेगा। अनाथालय के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग से अनुमति ली जा चुकी है।

पैनिक बटन वाली पहली स्कूल बस

पुरोहित ने बताया कि मूक-बधिरों के लिए पैनिक बटन वाली पहली 43 सीटर स्कूल बस भी बनाई गई है। बीच में मौजूद खंभों में पैनिक बटन लगाया गया है। इसे दबाते ही कंट्रोल रूम को मैसेज मिलेगा और बच्चों को तुरंत मदद मिल पाएगी। बस में महिला स्टाफ ही रहेगा। सीसीटीवी कैमरे और जीपीएस भी रहेगा। भोपाल में ड्राइवर द्वारा मूक-बधिर के साथ की गई घटना के बाद यह कदम उठाया गया है। जल्द ही इस बस से मूक-बधिर बच्चे माध्यमिक शाला भरमखेड़ी और गांधीनगर स्थित स्कूल जाएंगे। यह बस स्टेट बैंक आफ इंडिया की मदद से मिली है। गुरुवार को भोपाल से इसकी डिलीवरी भी मिल गई।

प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी

पुरोहित बताते हैं कि मूक-बधिरों की सांकेतिक भाषा को संवैधानिक दर्जा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्ध मोदी को चिट्ठी लिखी है। उनकी तरफ से जवाब भी आया है, जिसमें कहा गया है कि प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वहीं राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सांकेतिक भाषा को पढ़ाने की अनुमति दे दी गई है। हमारे द्वारा सांकेतिक भाषा के आधार पर मूक-बधिर समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की मांग भी की गई है।

Posted By: Sameer Deshpande

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close