Indore Ujjawal Shukla Column : उज्ज्वल शुक्ला, इंदौर (नईदुनिया)। भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या पिछले दिनों इंदौर आए थे। उनका यह दौरा विवादों की भेंट चढ़ गया। पहले उनका इंदौर में काफी विथ तेजस्वी कार्यक्रम रद हुआ तो फिर उज्जैन में दर्शन को लेकर हंगामा हो गया। उनके दौरे को लेकर युवा भाजपाइयों में खासा उत्साह था। युवा मोर्चा के शहर अध्यक्ष सौगात मिश्रा ने तैयारी भी जमकर की थी। दौरे में हुए विवादों के बाद मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वैभव पंवार ने मिश्रा को जमकर फटकार लगाई थी। कार्यकारिणी गठन को लेकर उन्हें अंतिम चेतावनी तक दी गई थी। इसके बाद से चर्चा चल पड़ी थी कि इंदौर में भाजयुमो के शहर अध्यक्ष को कभी भी बदला जा सकता है। अब उन्हीं मिश्रा को तिरंगा यात्रा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह मंच पर बुलाकर 'सौगात" दे गए। सीएम के मंच पर बुलाने से सौगात के साथ ही इंदौर के कई अन्य नेता भी आश्चर्य में पड़ गए।

विजयवर्गीय का चुनाव के पहले डिमोशन या बड़ी जिम्मेदारी की आहट!

मध्य प्रदेश में के प्रमुख भाजपा नेताओं में शामिल कैलाश विजयवर्गीय अब सिर्फ भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव रह गए हैं। उनसे बंगाल का प्रभार ले लिया गया है। बड़ी बात यह भी है कि दूसरे किसी राज्य की जिम्मेदारी भी उन्हें फिलहाल नहीं दी गई है। अप्रैल 2021 के चुनाव में आए परिणाम के बाद विजयवर्गीय ने बंगाल की तरफ झांककर भी नहीं देखा था। उम्मीद जताई जा रही थी कि इंदौर में महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगम चुनाव में मिली जीत के बाद कैलाश को पुरस्कार के बतौर कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी, इसके उलट उनसे बंगाल का प्रभार लेना राजनीतिक हल्कों में चर्चा का विषय है। मध्य प्रदेश में कैलाश विजयवर्गीय का नाम मुख्यमंत्री पद के दावेदारों की सूची में पिछले 15 सालों से शामिल किया जा रहा है। इस बार जब उन्हें बंगाल के प्रभार से मुक्त किया गया है, तब मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव आने वाले हैं।

शंकर ने बिगाड़ा दो नंबरियों का खेल

पुष्यमित्र भार्गव को महापौर का टिकट दिलाने से लेकर जिताने तक का श्रेय दो नंबर विधानसभा के विधायक और अन्य नेता लेने में कोई कमी नहीं कर रहे हैं। अब दो नंबरी खेमा नगर निगम की एमआइसी में भी अपने अधिक से अधिक समर्थकों को शामिल कराना चाहता है। वार्ड 66 की पार्षद कंचन गिदवानी को नगर निगम की अपील समिति में शामिल किया गया था, पर उन्होंने एनवक्त पर इंकार कर दो नंबरियों का पूरा खेल बिगाड़ दिया। गिदवानी सांसद शंकर लालवानी की खास समर्थक मानी जाती हैं, उन्हें टिकट भी सांसद के हस्तक्षेप के बाद ही मिला था। गिदवानी चार नंबर विधानसभा से एमआइसी की सबसे मजबूत दावेदार हैं। इसी दावेदारी को खत्म करने के लिए दो नंबरी नेताओं ने उन्हें अपील समिति में शामिल करा दिया था, पर उनका खेल सांसद समझ गए और उन्होंने भोपाल में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों से बात करके उनका नाम समिति से हटवाया।

राष्ट्रीय खेल से पहले खींचतान

राष्ट्रीय खेल गुजरात में होने वाले हैं। देश में खेलों का सबसे बड़ा कुंभ इसलिए होता है ताकि खेल भावना का विस्तार हो सके। मगर शुरुआत से पहले ही खेल भावना नदारद हो गई है। कई खेलों में समानांतर संगठन हैं। कुछ ने ओलिंपिक संगठन से मान्यता ले ली है तो किसी ने खेल के राष्ट्रीय संगठन से अनुमति की मुहर लगवा रखी है। अब प्रदेशभर में खींचतान मची है कि आखिर गुजरात कौन जाएगा। खेल संगठनों की 'कुश्ती" लड़ने वाले पहलवान जानते हैं कि जब नियम आड़े आते हैं तो दमदार लोग काम आते हैं। नतीजतन अधिकांश जगह पर नेताओं को पदासीन करा दिया जाता है। अंदरखाने से निकलकर आ रही खबरें बता रही हैं कि राष्ट्रीय खेलों में ओलिंपिक संघ की मान्यता काम आती है। खैर, पदाधिकारियों की खींचतान खेल शुरू होने के बाद भी चलती रहेगी। दोनों ओर से जोर लगाया जा रहा है। परेशान खिलाड़ी हैं कि जाएं तो जाएं कहां।

Posted By: Hemraj Yadav

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