विवेक पाराशर, बड़वानी/इंदौर (नईदुनिया)। इंदौर के सब्जी बाजार में मुनाफे का माफिया किस कदर हावी है, इसका ताजा उदाहरण बड़वानी जिले के गांव सजवानी का एक किसान बना है। विनोद सेप्टा नामक ये किसान इंदौर मंडी में ताजी गिलकी के 66 बैग (करीब 1320 किलो) लेकर पहुंचा। मंडी में बोली लगाने वाले बिचौलियों/दलालों ने उसे इसके सिर्फ 1980 रुपये दिए, मतलब एक किलो गिलकी का सिर्फ डेढ़ रुपया, जबकि यही गिलकी खेरची भाव में शहर में 40 से 50 रुपये किलो तक बिकी। बीच का सारा मुनाफा सब्जी माफिया डकार गया। किसान को बड़वानी से इंदौर तक गिलकी लाने में 2850 रुपये भाड़ा खर्च करना पड़ा। उसे मेहनत से उगाई गई गिलकी बेचने के बावजूद 820 रुपये जेब से खर्च करने पड़े।

शहर के बाजार में 40-50 रुपये किलो बिकी गिलकी

इंदौर शहर में शनिवार को गिलकी 40 से 50 रुपये किलो बिकी, लेकिन किसान को इसमें से सिर्फ डेढ़ रुपया प्रति किलो का ही पैसा मिला। यदि औसत भाव 40 रुपये किलो मानें, तब भी 38.50 रुपये प्रत्येक एक किलो गिलकी पर बिचौलियों की जेब में गए।

उपभोक्ता परेशान, किसान हताश, मजे में बिचौलिये

बड़वानी के किसान विनोद सेप्टा तो उदाहरण मात्र हैं, मध्य प्रदेश के कमोबेश हर सब्जी किसान की यही हालत है। उपभोक्ता महंगी सब्जियों के दाम चुकाते-चुकाते परेशान हैं तो किसान हाड़तोड़ मेहनत करके भी औने-पौने दाम में सब्जी बेचकर हताश हैं। बिचौलिये, आढ़तिये और दलाल पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।

मंडी में कई सब्जियां बेभाव बिक रही हैं। कई बार तो सब्जी बिक नहीं पाती और किसान उसे मंडी में फेंक कर जाते हैं। -फारुख राइन, थोक सब्जी मंडी कल्याण व्यापारी एसोसिएशन, इंदौर

Posted By: Prashant Pandey

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