इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्यप्रदेश में 1961 के बाद 2019 में मानसून सबसे देरी से विदाई लेगा। इससे एक नया कीर्तिमान बनेगा। 1961 के बाद 2007 में मानसून ने सबसे देरी से विदाई ली थी लेकिन 2019 में 15-16 अक्टूबर को विदाई के कयास लगाए जा रहे हैं। दिन में धूप और शाम को बारिश होने का सिलसिला हफ्तेभर से जारी है। मौसम के इस मिजाज ने त्योहारों की तैयारियों को भी प्रभावित किया है। पहले नवरात्र के आयोजन बारिश के कारण प्रभावित हुए और अब दशहरे के एक दिन पहले रावण के पुतले भी कई जगह भीग गए या गल गए हैं। फिलहाल शहर को मानसून की विदाई के लिए हफ्तेभर और इंतजार करना होगा। भोपाल स्थित मौसम केंद्र के अनुसार 1961 में 1 अक्टूबर को मानसून विदा हुआ था और 2007 में विदाई की तारीख 30 सितंबर थी। बारिश से अब लोग परेशान होने लगे हैं। कभी धूप निकलती है तो कभी अचानक बादल छा जाते हैं और फिर पानी बरसने लगता है। दो बार-बार धूप और बारिश से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी भी हो रही है।

इस तरह मानसून विदाई के मामले में 1961 के बजााय 2019 पहले नंबर पर, 1961 दूसरे व 2007 तीसरे नंबर पर दर्ज होगा। विशेषज्ञों ने बताया कि इंदौर और पश्चिमी मप्र में विपरीत हवाओं के टकराव से बारिश हो रही है। मंगलवार तक यह सिलसिला खत्म होने का अनुमान है।

पलासिया-विजय नगर क्षेत्र में तेज बारिश

सोमवार शाम को शहर के बड़े हिस्से में करीब पौन घंटा तेज बारिश हुई। पलासिया, विजय नगर, तलावली चांदा, लसूड़िया मोरी, निरंजनपुर, रीगल चौराहा, पाटनीपुरा और परदेशीपुरा समेत कई इलाकों में तेज बारिश हुई। पश्चिमी शहर का ज्यादातर हिस्सा सूखा रहा। सोमवार को विमानतल स्थित मौसम केंद्र में बारिश दर्ज नहीं की गई। शाम को बारिश के बाद मौसम में फिर ठंडक खुल गई जबकि दोपहर में धूप निकलने के बाद उमस होने लगी थी।

Posted By: Prashant Pandey

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