इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। इंदौर के रजत पाटीदार आइपीएल के प्लेआफ में शतक लगाकर नए धूमकेतु बनकर उभरे हैं। वे रायल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) की पहली पसंद नहीं थे, मजबूरी में किसी खिलाड़ी के चोटिल होने पर आरसीबी ने उन्हें चुना था। रजत इंदौर में शादी की तैयारियां छोड़कर लीग में गए और इसके बाद जो हुआ वह सभी ने देखा। इंदौर के युवा बल्लेबाज रजत पाटीदार ने नईदुनिया के खेल प्रतिनिधि कपीश दुबे से लीग के अपने अनुभव साझा किए।

प्रश्न - लीग की शुरुआत में आपको किसी टीम ने नहीं चुना था। क्या हताश थे?

रजत - मैं हताश नहीं होता और चयन के बारे में भी ज्यादा नहीं सोचता। मैं अभ्यास कर रहा था और रणजी टीम पर ध्यान दे रहा था। प्रदर्शन मेरे हाथ में है और उसी पर ध्यान देता हूं।

प्रश्न - शादी की तैयारियां छोड़कर लीग खेलने गए, जबकि खेलने की उम्मीद नहीं थी। बुरा नहीं लगा?

रजत - तब रणजी मैच भी नहीं थे, आइपीएल में चयन भी नहीं हुआ था। घर में शादी की चर्चा थी और तारीख तय होनी थी। इस बीच अचानक बुलावा आया। शादी तो बाद में भी हो सकती है। इसलिए तैयारियां छोड़कर चला गया। मेरे फैसले में दोनों परिवारों की सहमति थी।

प्रश्न - अंतिम एकादश में पहला मौका कैसे मिला?

रजत - राजस्थान रायल्स से मैच के लिए टीम को शीर्षक्रम में बल्लेबाज की जरूरत थी। कोच संजय बांगर ने एक दिन पहले मुझे बताया कि हम तुम्हें मौका दे रहे हैं। मैं भी अवसर की तलाश में था और खुद को तैयार करता रहता था। पहले मैच में तो बड़ी पारी नहीं खेली, लेकिन टीम प्रबंधन का भरोसा जीत लिया था।

प्रश्न - आपने प्लेआफ में दबाव के क्षणों में शतक लगाया। क्या स्वयं को उम्मीद थी कि शतक बन जाएगा?

रजत - मैंने संजय सर (बांगर) को गुजरात के खिलाफ मैच के बाद कहा था कि मैं जिस लय में खेल रहा हूं, शतक बना सकता हूं। मगर प्लेआफ के दिन शतक का नहीं सोचा था। मैं गेंद के हिसाब से शाट खेल रहा था। वह परिस्थिति ऐसी थी कि बड़ा स्कोर बनाना था, इसलिए हर गेंद पर बड़ा शाट खेलने की कोशिश कर रहा था। 90 के स्कोर पर पहुंचने के बाद भी दिमाग में शतक नहीं था।

प्रश्न - एक शतक ने आपको लोकप्रिय बना दिया। दिग्गजों की बधाई से कैसा महसूस हुआ?

रजत - शतक के बाद सभी ने बधाई दी। मगर सच कहूं तो मैं तारीफ को दिमाग में नहीं रखता। इससे एकाग्रता भंग होती है। क्रिकेटर में कभी अच्छा तो कभी खराब समय आता है। इसलिए तारीफ और आलोचना से प्रभावित नहीं होता। यह सही है कि यह शतक करियर का टर्निंग पाइंट है। वह एलिमिनेटर मैच था और हर हाल में जीतना जरूरी था।

प्रश्न - करियर की सफलता का श्रेय किसे देंगे?

रजत - बचपन में मेरे क्लब के बल्लेबाज सचिन धोलपुरे ने काफी मदद की। जब 19 साल का हुआ तो असली चुनौती और प्रतिस्पर्धा से सामना हुआ। इस समय पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी अमय खुरासिया ने मेरी तकनीक सुधारी, जो अब काम आ रही है। करियर में उतार-चढ़ाव आते हैं और बुरे दौर में अमय सर ने मुझमें भरोसा जताया। फिलहाल मप्र रणजी टीम के कोच चंद्रकांत पंडित से सीखने को मिल रहा है। वे बताते हैं कि बड़े खिलाड़ी किस तरह की सोच रखते हैं, कैसे तैयारी करते हैं।

प्रश्न - आइपीएल से क्या सीखकर लौटे?

रजत - विराट कोहली मेरे आदर्श हैं। उन्हें नेट्स पर बल्लेबाजी करता देखता था। उनका फुटवर्क, बल्ले का फ्लो जैसी बातों को गौर करता था। वे मैच के लिए किस तरह तैयारी करते हैं। सीनियर खिलाड़ियों के बीच में रहें तो अपने आप ही सीखने को मिलता है। यह सीखा कि मैच के दौरान किस परिस्थिति में वे कैसे शाट खेलते हैं, किस गेंदबाज के खिलाफ उनकी क्या रणनीति होती है। यह अनुभव बहुत उपयोगी रहा।

Posted By: Hemraj Yadav

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