इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। दृष्टिबाधित होने के बावजूद पढ़ाई में रुचि रखने वाली छात्राओं के लिए माता जीजाबाई शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय (ओल्ड जीडीसी) में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें छात्राओं को विशेष मोबाइल एप के बारे में बताया गया, जो उन्हें पढ़ने में मदद करेगा। यह एप छात्र शकुल सोनकर ने बनाया है, जो स्वयं दृष्टिबाधित हैं। शकुल ने कंप्यूटर साइंस में डिग्री हासिल की है। शकुल को एप बनाने में विवेक सक्सेना ने मदद की है।

विवेक सक्सेना ने बताया कि एप का नाम आय स्टेम है। इस एप की मदद से किसी भी भाषा की पाठ्य सामग्री को सुन सकते हैं। शकुल बताते हैं कि कई बार ब्रेल लिपि में किताबें नहीं मिलती थीं। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने दृष्टिबाधितों के लिए विशेष मोबाइल एप बनाने का सोचा। एप में कैमरा फीचर की मदद से किसी भी किताब के पन्नों को स्कैन किया जा सकता है। फिर पाठ्य सामग्री को सुनकर विद्यार्थी याद कर सकते हैं। इसमें उन्हें किसी की मदद नहीं लेनी पड़ेगी। कालेज की दृष्टिबाधित सहायता प्रकोष्ठ प्रभारी डा. बेला सचदेवा ने बताया कि एप के बारे में कालेज की 80 छात्राओं को जानकारी दी गई है।

तीस की उम्र के बाद नियमित बीपी की जांच जरूरी

इंदौर। वर्तमान जीवनशैली में युवा हापरटेंशन की जकड़ में आ रहे हैं लेकिन उन्हें ये पता ही नहीं होता है। जब तक पता चलता है काफी देर हो चुकी होती है। तीस साल की उम्र के बाद नियमित ब्लड प्रेशर की जांच जरूरी है। उपरोक्त विचार वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ अखिलेश जैन ने फैमिली फिजिशियन एसोसिएशन द्वारा 17 मई को मनाए जाने वाले वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे के उपलक्ष्य में आयोजित जागरूकता सेमिनार में कही। उन्होंने बताया हमारे देश में बीमारियों को काफी हल्के में लिया जाता है। हायपरटेंशन एक ऐसी बीमारी है जिसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। नियमित जांच से ही इस बीमारी का पता लगाकर उससे बचा जा सकता है।

Posted By: Hemraj Yadav

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