Indore Manish Joshi Column: मनीष जोशी, इंदौर, नईदुनिया। भिया अपन लोग किसी भी इवेंट का इंदौरीकरण करने में जरा भी देर नहीं करते। जहां चार इंदौरी मिले कि पूरे माहौल का इंदौरीकरण हो जाता है। अभी अपनी मध्य प्रदेश की टीम ने रणजी ट्राफी जीतकर इतिहास रच दिया। खास बात यह रही कि फाइनल मैच में इंदौरी छोरों ने गजब का खेल दिखाया और मुंबई को हराकर ट्राफी जीत ली। इधर, इंदौर के इंटरनेट मीडिया ग्रुपों पर बधाई संदेश चलने लगे। लोग बोल रहे थे मुंबई के वड़ा पाव पर इंदौरी पोहे भारी पड़े। अपने शुभम शर्मा और रजत पाटीदार ने बल्लेबाजी से जो पोहे बनाए उसमें सारांश जैन ने उसल जैसी अर्धशतक मार कर जीत झन्नाटेदार बना दी। इस पूरे पराक्रम में चंदू भिया (चंद्रकांत पंडित ने भी जमकर मेहनत की और टाइम-टाइम पर ट्रेनिंग का नींबू और जीरावन डालकर जीत को और भी टेस्टी बना दिया।

5जी टेक्नोलाजी पर लड़ेंगे अगला चुनाव

भिया जिस तरह से इस बार नगर निगम का चुनाव लड़ा जा रहा है उससे शहर में प्रचार के बदलते ट्रेंड का साफ पता चल रहा है। आजकल झंडे-बैनर उठाने वाले कार्यकर्ता मिल नहीं रहे हैं। अधिकतर प्रत्याशियों ने कुछ इवेंट मैनेजमेंट एजेंसियों को प्रचार का काम ठेके पर दे रखा है। कार्यकर्ता डिजिटल प्रचार में व्यस्त हैं और ज्यादातर मुंह दिखाई में भरोसा रख रहे हैं। अभी एक इवेंट एजेंसी वाले भिया ने बताया कि फेसबुक, वाट्सएप और यूट्यूब के जरिए ज्यादातर प्रचार हो रहा है। यहां तक कि जनसंपर्क के दौरान एजेंसी के कुछ बंदे क्षेत्र के रहवासियों के मोबाइल नंबर भी ले रहे हैं ताकि लगातार मैसेज करते रहें। भाई ने बताया कि अगले चुनाव तक 5जी टेक्नोलाजी आ जाएगी तो प्रचार और हाईटेक हो जाएगा। हो सकता है घर-घर प्रत्याशी वर्चुअल तरीके से जनसंपर्क करें और मतदाताओं से सीधे बात करें।

चुनावी हरिरामों से परेशान प्रत्याशी

नगर निगम के चुनाव में सबसे खास बात यह होती है कि लड़ाई का क्षेत्र बहुत छोटा होता है तो प्रतिद्वंद्वी भी कई बार अपना वाला ही होता है। इस बार के चुनाव में भी यही चीज दिख रही है। कुछ प्रत्याशियों के घर आगे-पीछे की गली में हैं, कुछ की दुकानें आमने-सामने हैं तो कई एक ही समाज के हैं और एक ही सामाजिक संगठन में सक्रिय भी। इसी तरह के समीकरण कार्यकर्ताओं में भी होते हैं। ऐसे में कुछ वार्डों में प्रत्याशी शोले वाले हरिरामों से परेशान हैं जो इधर की खबर उधर पहुंचा रहे हैं। हाल ही में एक वार्ड के प्रत्याशी इस समस्या से दो-चार हुए। उनके शुभचिंतक ने कहा कि भिया आप तो अगले को टीम से बाहर कर दो। ऐसा है कि चूहा बोरी उठा नहीं सकता पर उसे फाड़ जरूर सकता है। इसलिए सतर्क रहने की जरूरत तो है वर्ना अगला रायता ढोल देगा।

बैंक वीर योजना भी लाओ यार भिया

अगर किसी छोटे-मोटे काम के लिए सरकारी बैंक जाना पड़े तो पूरे दिन का हिसाब-किताब गड़बड़ हो जाता है। अभी अपने एक मित्र पासबुक अपडेट करवाने के लिए बैंक गए। उन्होंने आपबीती बताई। बोले- वैसे तो बैंक के पास एटीएम में पासबुक प्रिंटिंग की मशीन रखी थी लेकिन वो खराब थी। अपन ने पासबुक प्रिंटिंग के काउंटर पर नजर मारी तो लंबी लाइन लगी थी। जो मैडम वहां बैठी थीं वो बार-बार कंप्यूटर सिस्टम अटकने की बात कह रही थीं। कुछ देर तक लोग खड़े रहे फिर अचानक से मैडम गायब हो गईं। पता चला लंच के लिए गई हैं। एक घंटे लोग लाइन में लगे रहे लेकिन मैडम का लंच खत्म नहीं हुआ। आखिर करीब सवा घंटे बाद वह आईं तो फिर मोबाइल पर बात करने लगीं। लोग झल्ला गए। एक भिया बोले- यार बैंक वीर योजना भी लानी चाहिए, ऐसे तो ये लोग 60 साल तक लंच ही करते रहेंगे।

Posted By: Sameer Deshpande

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