History of Indore: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। यह एक ऐसा नगर है जिसने न जाने कितने इतिहास रचे, सफलता की कई इबारतें लिखीं और कई मुश्किल दौर में सांसें लीं, लेकिन हर बार अपनी अलग पहचान बनाई। इंदौर का इतिहास कितना पुराना है, इसका ठोस प्रमाण तो नहीं है, लेकिन यह जरूर है कि यहां मिले बस्ती के अवशेष करीब साढ़े तीन हजार वर्ष पुराने हैं। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि यह बस्ती पुरानी है, पर नगर नया है।

जिस नगर ने स्वच्छता के पंच लगाए, उस इंदौर में करीब एक हजार वर्ष पुराना इंद्रेश्वर महादेव मंदिर है, जो इस बात का प्रमाण है कि यहां बस्ती तब भी हुआ करती थी और इसलिए ही महादेव के इस मंदिर के नाम पर नगर का नाम पहले इंद्रपुर रखा गया। मराठा शासकों के यहां आने पर यह इंदुर बना और अंग्रेजों ने इसे इंदौर नाम दिया। जो स्थान केवल कृषि पर निर्भर था, आज उसी नगर ने औद्योगिक, शिक्षा, चिकित्सा, स्वच्छता आदि क्षेत्रों में अपना वर्चस्व स्थापित किया है।

इतिहास में रुचि रखने वाली शर्वाणी बताती हैं कि पेशवा ने मालवा को चार भागों में बांटकर यहां की सूबेदारी मल्हारराव होलकर को दी। मालवा एक ऐसा भाग है, जहां की भौगोलिक परिस्थिति और उत्पादकता बहुत अच्छी है। कान्ह और सरस्वती नदी के नगर में होने से यहां से गुजरने वाली सेनाओं का पड़ाव भी रहां रहता था। इसलिए भी इसकी सूबेदारी की जिम्मेदारी देना जरूरी था।

महामारी के दौर से गुजरा नगर

इस नगर ने कई विषम परिस्थितियों का भी सामना किया। 1890 के दशक और 1900 में जब महामारी की चपेट में नगर आया तो यहां कई मौतें भी हुईं। नगर की पुरानी बसाहट सघन बस्ती की थी, जिससे मृत्युदर बहुत रही। ऐसे में नगर ने विकास की एक नई रेखा खींची। महामारी के कारण जब लोग नगर से पलायन करने लगे या मरने लगे तो नगर का विकास फैलाव का रूप लेने लगा। शर्वाणी बताती हैं कि उस वक्त तुकोजीराव तृतीय ने पैट्रिक गेडेज की मदद से नगर तथा ग्राम निवेश किया और नगर का फैलाव हुआ।

मिल से बदली नगर की तस्वीर

विकसित होते नगर में कपड़ा मिलों का भी योगदान रहा। तुकोजीराव द्वितीय के प्रयासों से कपड़ा मिल यहां शुरू हुई। इससे न केवल अर्थव्यवस्था बेहतर हुई अपितु नगर की संस्कृति, खानपान में विविधता भी आई। देश के विभिन्न राज्यों से श्रमिक यहां आए और नगर का रिक्त भाग बसाहट में बदला। एक समय जहां नगर नदी, कुएं और बावड़ी पर ही निर्भर था, वहीं यशवंत राव ने पश्चिमी भाग में जल आपूर्ति के लिए गंभीर नदी पर बांध बनवाकर यशवंत सागर से जल आपूर्ति कराई और बाद में नर्मदा के कदम नगर में पड़े।

Posted By: Sameer Deshpande

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