इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोरोना संक्रमण रोकने के लिए प्रशासन ने भले ही रात को कर्फ्यू लगा दिया, लेकिन शनिवार को शहर के कई इलाकों में उसका ज्यादा असर नहीं दिखा। न पुलिस ने सख्ती दिखाई, न लोगों ने स्वेच्छा से कर्फ्यू का पालन किया। प्रशासन ने रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू लगाया, लेकिन राजवाड़ा पर 10 बजे के बाद दुकानें खुली दिखी और लोग भी आवाजाही करते रहे। सराफा चौपाटी की दुकानें जरुर बंद होने लगी, लेकिन लोग 10 बजे बाद भी चौपाटी पर टहलते नजर आए। 56 दुकान रात 9 बजे बाद ही बंद होने लगी थी। बबंई बाजार क्षेत्र में भी दुकानें साढ़े 10 बजे के बाद तक खुली दिखाई दी। पलासिया, मालवा मिल क्षेत्र, विजय नगर सहित अन्य इलाकों में भी रात 10 बजे के बाद सख्ती जैसा माहौल दिखाई नहीं दे रहा था।

बता दें कि कलेक्टर मनीषसिंह ने दंड प्रक्रिया संहिता-1973 की धारा-144 के तहत आदेश जारी किया है कि इंदौर शहर में रात 10 से सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू रहेगा। इस समयावधि में दुकानें और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहेंगे। इस प्रतिबंध से उद्योगों को छूट दी गई है।

इंदौर में पिछले कुछ दिनों से कोरोना पॉजिटिव मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य शासन ने शुक्रवार को ही आदेश जारी कर दिए थे। इसके बाद संबंधित जिला प्रशासन पर यह जिम्मेदारी थी कि वे स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए अपने यहां आपदा प्रबंधन समूह की बैठक कर प्रतिबंधों के बारे में तय करें और इसके लिए राज्य शासन से अनुमति प्राप्त करें। आदेश के तहत जिला प्रशासन ने अपील की है कि प्रतिबंध की समयावधि में अत्यंत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलें। सभी नागरिकों के लिए चेहरे पर मास्क का उपयोग अनिवार्य है। मास्क का उपयोग न करने पर निर्धारित जुर्माना लगाया जा सकेगा और वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। मास्क इस तरह लगाया जाए जिससे अन्य लोगों से आपस में मिलने के दौरान मुंह और नाक ढंके रहें, ताकि एक-दूसरे की सांस के द्वारा वायरस न फैलने पाए।

प्रशासन के आदेश में यह भी कहा गया है कि कक्षा पहली से आठवीं तक जिले के सभी स्कूल 31 दिसंबर, 2020 तक बंद रहेंगे। कक्षा 9 से 12 तक के स्कूली छात्र-छात्राएं स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार स्कूल जा सकेंगे। प्रशासन के इस आदेश का उल्लंघन करने पर भारतीय दंड विधान की धारा-188 के तहत यह दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगा। बहुत विशेष परिस्थितियों में जिला प्रशासन को आवेदन देने पर इस पर विचार किया जा सकेगा और कलेक्टर के संतुष्ट होने पर लागू शर्तों से छूट दी जा सकेगी।

Posted By: dinesh.sharma

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