इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। साइबर सेल ने जिस फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर गिरोह को पकड़ा है उसके सदस्य अमेरिकी सीनियर सिटीजन से तीन साल में 90 करोड़ डॉलर की ठगी कर चुके हैं। उधर, साइबर सेल ने गुरुवार दोपहर होटलों के बेसमेंट और बिजनेस स्काई पार्क में छापा मारा। पूछताछ करने पर लोगों ने बताया कि आरोपितों ने मंगलवार दोपहर ऑफिस से सामान गायब कर दिया और गाड़ियों की नंबर प्लेट तोड़कर फरार हो गए। पुलिस कॉल डिटेल और टॉवर लोकेशन के आधार पर तलाश में जुटी है।

आरोपित जावेद ने पूछताछ में कबूला कि उसके पिता प्रॉपर्टी ब्रोकर हैं। दो भाई और दो बहनें हैं। आठवीं तक पढ़ने के बाद काम की तलाश की और सड़कों पर डोंगल बेचने लगा। इसी दौरान अहमदाबाद में मुस्तफिर से दोस्ती हुई और उसने बीपीओ कंपनी में काम पर रख लिया। करीब पांच साल पूर्व मुस्तफिर कोलकाता चला गया और जावेद ने खुद का काम शुरू कर लिया। शुरुआत में उसे 30 लाख रुपए का घाटा हुआ। पिता का मकान बेचा और सोचा जहां नुकसान हुआ, वहीं से कमाऊंगा। वर्ष 2017 में अहमदाबाद में फर्जी कॉल सेंटर खोलकर लाखों रुपए कमा लिए। जांच एजेंसियों की नजरों में चढ़ने के बाद वह पुणे चला गया। एक वर्ष पहले सनी उर्फ अंकित से बात हुई और पिछले वर्ष जुलाई में इंदौर में सेंटर शुरू कर दिया। उसने 30 हजार रुपए महीने पर श्रीराम एनक्लेव सवा लाख रुपए महीने पर चार फ्लैट, पिनेकल ड्रीम में एक लाख महीने पर चार फ्लैट व 70 हजार रुपए महीने पर ऑफिस किराए पर लिया था। उसने कबूला कि टेलिकॉम सर्विस कंपनी खेतान और फ्यूनेट से लीज लाइन कनेक्शन ले लिया था।

एसपी (साइबर) जितेंद्रसिंह के अनुसार आरोपित जावेद मेनन, भाविल प्रजापति और शाहरुख मंसूरी ने रिमांड के दौरान कबूला कि उनके चार साथी मिनेष उर्फ डॉन (अहमदाबाद), हार्दिक नंदानिया (राजकोट), सिद्धार्थ रामचंदानी (अहमदाबाद) और केवल साधु (अहमदाबाद) भी फर्जी कॉल सेंटर चला रहे हैं। दोपहर को इंस्पेक्टर राशिद अहमद और सब इंस्पेक्टर अमोद राठौर की चार टीमों ने पीयू-4 स्थित एक इमारत, होटल सिल्वोटेल के बेसमेंट, होटल बिट्स एंड बाइट के ऊपर और एबी रोड स्थित बिजनेस स्काई पार्क की चौथी मंजिल पर छापा मारा। लेकिन तीन स्थानों पर तो ताला लगा मिला।

बिजनेस स्काई पार्क में ऑफिस खुला था और सामान गायब था। पूछताछ में इमारतों के प्रबंधन ने बताया कि आरोपित अक्सर रात में ही आते थे। उन्होंने शेयर एडवाइजरी और बीपीओ कंपनी के नाम से ऑफिस किराए पर लिए थे। मंगलवार दोपहर दिव्या क्रिस्टल और प्लेटिनम प्लाजा में छापा पड़ने के बाद वे सामान लेकर भाग गए थे। कुछ लोगों ने उन्हें गाड़ियों की नंबर प्लेट तोड़ते हुए भी देखा था। पुलिस उनके मोबाइल की लोकेशन और कॉल डिटेल निकाल रही है।

निशाने पर रहते थे सीनियर सिटीजन

साइबर सेल ने अमेरिकी गुप्तचर एजेंसी एफबीआई के लीगल अटैची टु इंडिया को ईमेल से जानकारी भेजी है। पुलिस को एक रिपोर्ट से यह पता चला कि फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर चलाने वाला गिरोह ज्यादातर अमेरिकी सीनियर सिटीजन को निशाना बनाता है। गिरोह के सदस्य वर्ष 2016 से अभी तक 90 करोड़ डॉलर यानी करीब 6 अरब 30 करोड़ रुपए की ठगी कर चुके हैं। पुलिस को जावेद और शाहरुख के ऑफिस से वह डेटा हाथ लगा है जिसमें ठगाए लोगों के नंबर, रिकॉर्ड, एसएसएन, ईमेल एड्रेस हैं। एसपी के अनुसार पूरी जानकारी एफबीआई को भेज कर पीड़ितों से संपर्क किया जाएगा। वीडियो कॉन्फ्रेंस की मदद से उनके बयान लेकर उन्हें बतौर गवाह पेश भी किया जाएगा। दूतावास की मदद से कुछ पीड़ितों को भारत बुलाने के प्रयास भी किए जाएंगे।

बड़े कारोबारियों से एक लाख डॉलर तक ऐंठ चुका है गिरोह

एसपी के अनुसार जावेद ने पूछताछ में कबूला कि वह उन लोगों का रिकॉर्ड रखता था जिन्हें धमकाकर रुपए ले चुका है। कुछ साल बाद दोबारा उन्हें टारगेट करना चाहता था। उसने यह भी बताया कि एक बार उसने एक अमेरिकी से 28 हजार 600 डॉलर यानी करीब 21 लाख रुपए ऐंठे थे जबकि उसके साथी 1 लाख डॉलर यानी करीब 70 लाख तक खातों में जमा करवा चुके हैं।

ठगी के तीन तरीकों से एफबीआई भी हैरान

एसएसएन अफसर : आरोपित खुद को द यूनाइटेड स्टेट्स सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन अधिकारी बताकर वॉइस मैसेज करते थे। उन्हें ड्रग ट्रैफिकिंग और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अवैध कार्यों में लिप्त होने की धमकी देते हैं। अमेरिका में लोगों के बैंक, वाहन, टोल पास, बिजली बिल सहित सारी जानकारी एसएसएन से जुड़ी होती है। बहस करने पर कॉलर उनसे कहता है कि तुमने गाड़ी किसी को दी थी। उसी से जांच एजेंसी ने ट्रैक किया है। व्यक्ति घबरा कर रुपए देने पर राजी हो जाता है।

रेवेन्यू सर्विसेस ऑफिसर : आरोपित खुद को अमेरिकी टैक्स विभाग आईआरएस यानी इंटरनेशनल रेवेन्यू सर्विस विभाग का अधिकारी बनकर कॉल करते थे। टैक्स गड़बड़ी, टैक्स फॉर्म, पुरानी छिपाई आय व जेल भेजने, भारी जुर्माने की धमकी देकर मोटी रकम मांगते थे। पीड़ित से गिफ्ट कार्ड खरीदने, बिट क्वॉइन और वायर के जरिए रुपए जमा कराने का सुझाव दिया जाता था।

चाइल्ड पोर्नोग्राफी और पायरेटेड में फंसाने की धमकी : आरोपित एसएसएन से नंबर लेकर वॉइस मैसेज के मार्फत कहते थे कि यह कॉल आपके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के लिए किया गया है। आप पायरेटेड सॉफ्टवेयर और चाइल्ड पोर्नोग्राफी में लिप्त हैं। उनसे समझौता कर मामला रफा-दफा करने के लिए रुपए मांग लेते थे।

यूएस नंबरों से चला रहे वाट्सएप, इंटरनेट कॉलिंग से करते संपर्क

एसपी के अनुसार पुलिस को पता चला कि हार्दिक ने पीयू-4 की एक इमारत, केवल साधु ने सिल्वोटेल के बेसमेंट, सिद्धार्थ ने बिट्स एंड बाइट के ऊपर व मिनेष ने बिजनेस स्काई में ऑफिस खोला था। इनका साथी सनी उर्फ अंकित चौहान, हार्दिक व मिनेष के कॉल सेंटर में पार्टनर है। पुलिस को 12 लोगों की जानकारी मिली है जो अमेरिकियों के सोशल सिक्योरिटी नंबर (एसएसएन) सॉफ्टवेयर, डिवाइस उपलब्ध करवाते थे। आरोपित भारत में ही रहते हैं लेकिन यूएस के नंबरों से वाट्सएप चलाते हैं। इन्होंने अलग-अलग ग्रुप भी बना रखे हैं और एक-दूसरे से इंटरनेट कॉलिंग का उपयोग करते हैं।

10 राज्यों की युवतियों व युवकों की भर्ती करते हैं आरोपित

ठगी के लिए नागालैंड, मेघालय, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, यूपी, मध्यप्रदेश, मणिपुर, दिल्ली व हरियाणा के युवक-युवतियों की ही भर्ती की जाती है। यहां काम करने वालों को अंग्रेजी आना जरूरी है। इन्हें ठहरने व खाने के अलावा हर महीने वेतन व इन्सेंटिव दिया जाता है।

Posted By: Nai Dunia News Network