Interview: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। स्वच्छता में शानदार उपलब्धि को लेकर इंदौर की गूंज देश ही नहीं, विदेश तक फैली है। ऐसे में इंदौर पर अब और बड़ी जिम्मेदारी है कि वह न केवल स्वच्छता की इस सफलता को लगातार दोहराए, बल्कि पहले से और बेहतर व शानदार शहर बनकर दिखाए। इस जिम्मेदारी का सबसे ज्यादा अहसास नगर के प्रथम नागरिक अर्थात महापौर पुष्यमित्र भार्गव से बेहतर और किसे हो सकता है। यही वजह है कि इस सप्ताह के विशेष साक्षात्कार के लिए नईदुनिया ने उनसे बात की। नईदुनिया के हर प्रश्न में इंदौर की चिंता थी, तो महापौर के हर जवाब में इंदौर का हित।

प्रश्न- नए इंदौर की उन्नति के लिए क्या योजनाएं हैं?

उत्तर - स्वच्छता इंदौर का आधार है, हमें उम्मीद है कि इंदौर इस वर्ष स्वच्छता के सातवें आसमान को छुएगा। शहर मे जल वितरण की व्यवस्था को हम बेहतर बना पाए हैं और नर्मदा के चौथे चरण से भी शहर की जलापूर्ति होगी। सूचना प्रोद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में हम डिजिटलाइजेशन पर फोकस कर रहे है। इंदौर टियर 1 सिटी में शुमार हो, इसके लिए प्रयास करेंगे। शहर में बड़े आयोजनों के लिए बेहतर कन्वेंशन सेंटर बने, इसके लिए भी प्रयास कर रहे हैं।

प्रश्न - अब वाटर प्लस, स्वच्छ पेयजल के साथ ही स्वच्छ सर्वेक्षण भी होना है, इसे लेकर निगम की क्या तैयारी है?

उत्तर - वाटर प्लस का खिताब पूर्व में हमें मिल चुका है। अब हम फिर से इस प्रमाण पत्र को लेने का प्रयास करेंगे। शहर में हमने ड्रेनेज व सीवरेज सिस्टम बेहतर किए हैं। शहर में स्टार्म वाटर व ड्रेनेज लाइन भी अलग-अलग की गई है। आने वाले समय में हम एक लाख घरों में 24 घंटे पानी देने का प्रयास कर रहे हैं। स्वच्छ सर्वेक्षण हर बार की तरह इस बार हमारी सातवां आसमान छूने की तैयारी है।

प्रश्न - अधूरे विकास कार्य की गति तेज हो और समय सीमा में पूरा हों, इसे लेकर क्या योजना है?

उत्तर - निगम अपने रेवेन्यू बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहा है। हमारी कोशिश है कि संपत्ति कर व जल कर की 80 प्रतिशत तक वसूली हो। इस राशि के मिलने से हम संबंधित ठेकेदारों के भुगतान की प्रक्रिया को तेज कर सकेंगे। इससे विकास कार्य को गति मिलेगी। निर्माण कार्य में देरी व लापरवाही करने वाली एजेंसियों पर निगम द्वारा कार्रवाई की जाती है और कंपनियों को ब्लैकलिस्ट भी करते हैं।

प्रश्न - ट्रैफिक आपकी प्राथमिकता में शामिल है। शहर के यातायात को व्यवस्थित करने के लिए आपकी क्या योजना है?

उत्तर - प्रवासी भारतीय सम्मेलन व ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट के दौरान आठ दिन तक शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को संभालने के लिए हमने ट्रैफिक मित्र योजना चलाई। इसमें युवा वालेंटियर शामिल हुए। इसका ही असर था कि शहर में कही भी ट्रैफिक जाम नहीं लगा। इस तरह ट्रैफिक के जनजागरण का अभियान जारी रहेगा। निजी एजेंसी के माध्यम से सर्वे कर हम शहर के 25 साल के बाद ट्रैफिक प्लान बनाएंगे। शहर में एक ट्रैफिक सेल बना रहे हैं जिसमें निगम के अधिकारी, ट्रैफिक पुलिस, जनप्रतिनिधि, विशेषज्ञ व प्रबुद्ध लोग शामिल होंगे। ये लोग शहर के ट्रैफिक की बेहतरी के लिए प्रयास करेंगे।

प्रश्न - 29 गांव निगम सीमा में शामिल तो हो गए, लेकिन ग्रामीणों को अब तक शहरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। जबकि शुल्क वे नगर निगम सीमा का दे रहे हैं। वहां सड़कें सबसे बड़ी समस्यां है। कब तक ये व्यस्था ठीक हो पाएगी?

उत्तर - निगम सीमा में शामिल 29 गांवों के विकास को लेकर एक विशेष सेल बनाया है। आने वाले बजट 29 गांवों के लिए अलग से पैकेज होगा। शहर के अन्य वार्डों के मुकाबले 29 गांवों के वार्डों का चार गुना बजट होगा।

Posted By: Hemraj Yadav

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