Investors Summit Indore गजेंद्र विश्वकर्मा, इंदौर। जनवरी 2023 में होने जा रही इंवेस्टर्स समिट के बहाने शहर की छोटी आइटी कंपनियों और स्टार्टअप को भी कई लाभ मिलेंगे। देश-विदेश की कंपनियों के साथ ही प्रदेश की ऐसी कंपनियों की भी तलाश की जा रही है जिनका रूप आगे जाकर और बढ़ा हो सकता है। मध्य प्रदेश सरकार ने 2022 में स्टार्टअप नीति भी इसी को देखकर बनाई है कि यहां की कंपनियों और स्टार्टअप को जल्द से जल्द सफलता मिले। इसमें दफ्तर के किराए के साथ ही महिलाओं को विशेष छूट दी जा रही है।

इंवेस्टर्स समिट में अकेले इंदौर से ऐसी 50 आइटी और स्टार्टअप के संचालक शामिल होंगे जिनसे प्रदेश सरकार के अधिकारी सीधे बात करेंगे और उनकी जरूरतें जानेंगे। इसमें जमीन, फंडिंग से लेकर विदेशों में उत्पादों को निर्यात करने में सरकार मदद करेगी। दो वर्ष में शहर की 30 से ज्यादा कंपनियों और स्टार्टअप को 1500 करोड़ रुपये की फंडिंग मिली है। इसमें हाल ही में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े स्टार्टअप को दस करोड़ रुपये और मेडिकल सेवा दे रहे स्टार्टअप को पांच करोड़ रुपये की फंडिंग मिली है।

इंदौर के स्टार्टअप बड़े होते जा रहे हैं। इससे रोजगार भी बढ़ रहा है इसलिए सरकार बड़ी कंपनियों के साथ ही स्थानीय कंपनियों का भी ध्यान रख रही है। इंवेस्ट इंदौर के सचिव सावन लड्ढा का कहना है कि यह पहला मौका है जब देश-विदेश के निवेशक इंदौर में होंगे। जिन आइटी कंपनियों और स्टार्टअप को विश्व स्तर पर पहचान चाहिए उनके लिए इंवेस्टर्स समिट में सभी प्रमुख उद्योगपतियों से मिलने का मौका सरकार देगी। हम कुछ ऐसे नामों का चुनाव करके सरकार को दे रहे हैं जो कंपनियां भविष्य में यूनिकार्न बन सकती हैं।

आइटी में 50 हजार और स्टार्टअप में 20 हजार युवाओं को मिली नौकरी

टीसीएस और इंफोसिस के बाद शहर में अब एक्सेंचर, पर्सिस्टेंस सिस्टम्स, ग्लोबैंड जैसी कंपनियां भी शहर में आ चुकी हैं। शहर के दोनों आइटी पार्क में भी पूरी क्षमता से आइटी कंपनियां कार्य कर रही हैं। सुपर कारिडोर पर भी शासन जगह तलाश रहा है। कई कंपनियों ने विजय नगर क्षेत्र में दफ्तर खोले हैं। स्टार्टअप भी अब कार्पोरेट दफ्तर बना रहे हैं। शहर में हाल ही में बनी नई बिल्डिंगों में स्टार्टअप स्थापित होते जा रहे हैं।

आइटी कंपनियों में इस समय 50 हजार से ज्यादा कर्मचारी कार्य कर रहे हैं और स्टार्टअप 20 हजार से ज्यादा युवाओं को रोजगार दे रहे हैं। शहर में कुल स्टार्टअप की संख्या 700 है। इसमें 30 प्रतिशत महिला उद्यमी संचालित कर रही हैं। शहर में आइटी और शिक्षा से संबंधित कई नए स्टार्टअप शुरू हुए हैं।

स्टार्टअप अब पहले से ज्यादा मजबूत

तीन से चार वर्ष पहले कई स्टार्टअप को सरकारी और अन्य मदद नहीं मिल पाती थी। इससे कई स्टार्टअप बंद हो जाते थे। पिछले दो वर्ष की स्थिति देखें तो शहर से एक भी ऐसा स्टार्टअप नहीं है जो बंद हुआ हो। इंदौर आंत्रप्रेन्योर नेटवर्क के संयोजक अतुल भरत का कहना है कि स्वच्छता और कनेक्टिविटी के मामले में शहर की छवि और बेहतर हुई है। यहां किसी भी शहर और देश में जाने के लिए सभी तरह के साधन मौजूद हैं।

स्टार्टअप के लिए इकोसिस्टम बेहतर हो रहा है और स्टार्टअप नीति भी लागू हो चुकी है। ऐसे में बेंगलुरु, हैदराबाद, दिल्ली और मुंबई के स्टार्टअप भी शहर में अपने दफ्तर शुरू कर रहे हैं। यहां शिक्षण संस्थानों की संख्या भी अच्छी है। आइआइटी, आइआइएम सहित बेहतर इंजीनियरिंग संस्थान होने से कार्य करने के लिए युवा भी मिल जाते हैं। शहर के आसपास जमीन की उपलब्धता भी बनी हुई है।

Posted By: Sameer Deshpande

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