इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि । इंदौर शहर मुझे अच्छा लगता है क्योंकि यह सांस्कृतिक नगरी है। यहां का अपना इतिहास है, इसकी अपनी विरासत है। यह एक जिम्मेदार शहर है जिसने अर्थ, संस्कृति, राजनीति, सामाजिक, कला सभी दायित्वों को निभाया है। जहां तक शहर में फिल्म सिटी बनने की बात है तो यदि वह यहां या प्रदेश में कहीं भी बनती है तो अच्छा ही होगा लेकिन फिल्म सिटी का बनाना यह सुनिश्चित नहीं करेगा कि सभी स्थानीय कलाकारों को काम मिल ही जाएगा। वास्तव में यहां के कलाकारों को सहानुभूति की नहीं प्रोत्साहन की जरूरत है। यह बात ख्यात फिल्म कलाकार मुकेश तिवारी ने शहर के युवा कलाकारों द्वारा बनाई गई शार्ट फिल्म नियतिचक्र को लेकर हुई पत्रकारवार्ता में इंटरनेट मीडिया के माध्यम से कहीं।

इस फिल्म में विज्ञानी की भूमिका निभाने वाले मुकेश तिवारी ने कहा कि कोरोनाकाल में बहुत कुछ बदला है। इस दौरान एक अौर अच्छी बात सामने अाई कि भारतीयों ने एक-दूसरे के लिए मदद का हाथ बढ़ाया अौर समाज के अंतिम व्यक्ति तक की मदद की। कार्यशैली में भी परिवर्तन अाया। इन दो सालों में कंटेंट पर बेहतर काम हुअा है। अोटीटी प्लेटफार्म पर जिस तरह की अश्लीलता, अपशब्द परोसे जा रहे हैं उसके खिलाफ में तीन साल से अावाज उठा रहा हूं। हम भूल जाते हैं कि कई ऐसे परिवार भी इन्हें देख सकते हैं, जहां संस्कार अौर संस्कार देने वाले अभी भी हैं। हम ऐसा कंटेंट परोसें जो समाज को कुछ बेहतर दे सके। यह जिम्मेदारी, निर्माता, निर्देशक, लेखक अौर कलाकार सभी की है।

मुंबई से सीख यहां कर सकते हैं बेहतर काम

कुंवर अमर ने कहा कि शहर में हुनर की कमी नहीं है। ऐसा नहीं कि यहां का युवा मुंबई में बनने वाली फिल्मों की तरह फिल्म नहीं बना सकता। यहां भी बेहद उम्दा कार्य हो रहा है। हां पर यह जरूर है कि कार्य को लेकर जितनी परिपक्वता, व्यवासिकता, अनुशासन वहां है हमें उसे सीखना होगा। वहां से अाप दक्ष होकर यहां काम कर सकते हैं। मैंने यह फिल्म केवल इसलिए नहीं की क्योंकि मैं खुद इंदौर का हूं बल्कि इसलिए भी की ताकि मैं इसका प्रमाण दे सकूं कि यहां का हुनर भी बेहतर कार्य करता है। इसके अलावा मुझे अपनी डांस के जरिए बनी छवी तोड़ना भी थी।

Posted By: Sameer Deshpande

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