Kande Ki Holi : इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। गाय के गोबर के कंडों की होली जलाकर इस बार इंदौर सहित मालवा-निमाड़ में 11 लाख से ज्यादा कंडों की आहुति देकर जंगल और पर्यावरण को बचाया। पिछले साल से कंडों की यह संख्या लगभग दोगुनी है। पूरे अंचल से 700 से ज्यादा संस्थाएं और समाज आगे आए हैं। पिछले साल से 75 फीसदी संस्थाएं ज्यादा जुड़ी हैं। इस पूरे अभियान में समाजजन, युवा, महिलाएं, बुजुर्ग, स्कूल-कॉलेज के बच्चे सहित छोटी-छोटी संस्थाएं भी आगे आई हैं।

सबसे बड़ी होली उज्जैन की तीन हजार साल पुरानी सिंहपुरी की होली रही। इसमें पांच हजार कंडों का इस्तेमाल किया गया। वहीं इंदौर और सेंधवा में तीन हजार कंडों तक की होली जलाई गई। मप्र टिंबर फेडरेशन के अध्यक्ष दानबीर सिंह छाबड़ा के अनुसार इंदौर जैसे बड़े शहर में भी अब लकड़ी की मांग महज 10 फीसदी ही रह गई है। 'नईदुनिया' लगातार चार साल से कंडों की होली Kande Ki Holi का अभियान चलाकर लोगों को गोशालाओं को आर्थिक रूप से संबल बनाने और पर्यावरण बचाने की पहल कर रहा है। उसका सकारात्मक असर नजर आने लगा है।

प्रदेश में 35 लाख कंडों से जली होली

सोमवार को प्रदेश में लगभग 35 लाख कंडों से होलिका दहन हुआ। सबसे ज्यादा 12 लाख कंडों का इस्तेमाल ग्वालियर-चंबल संभाग में हुआ। इंदौर-उज्जैन संभाग में 11 लाख, भोपाल सहित ग्रामीण अंचल में 9 लाख और जबलपुर व आसपास के आठ जिलों में 3.29 लाख कंडों से होलिका दहन किया गया। पर्यावरण बचाने की इस पहल में शामिल होने के लिए लोगों ने एक-दूसरे को प्रेरित किया।

Posted By: Prashant Pandey

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