इंदौर। कविता रैना हत्याकांड की सीबीआई जांच नहीं होगी। इसकी मांग करते हुए हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका का निराकरण करते हुए कोर्ट ने कहा कि न तो कविता के परिवार का कोई सदस्य कोर्ट आया न ही आरोपित या उसके परिवार का।

याचिकाकर्ता ऐसा कोई भी तथ्य नहीं रख सके जिसकी वजह से सीबीआई जांच के आदेश दिए जाएं। कोर्ट ने डीजीपी को उन सभी अधिकारियों पर कार्रवाई करने को कहा है जिन्हें ट्रायल कोर्ट ने जांच में लापरवाही बरतने का दोषी पाया है।

गौरतलब है कि कविता रैना हत्याकांड के आरोपित महेश बैरागी को 18 मई 2018 को सेशन कोर्ट ने बरी कर दिया था। संस्था लॉयर्स फॉर जस्टिस ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग करते हुए हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।

याचिकाकर्ता की तरफ से सीनियर एडवोकेट चंपालाल यादव और ओमप्रकाश सोलंकी ने पैरवी की। याचिका में कहा था कि सेशन कोर्ट के फैसले के बाद यह तो तय हो गया कि कविता की हत्या महेश बैरागी ने नहीं की थी लेकिन उसकी हत्या तो हुई, इसलिए यह पता लगाया जाना चाहिए कि कविता का असली हत्यारा कौन है। सेशन कोर्ट ने भी पुलिस की जांच पर सवाल उठाया है।

करीब 15 दिन पहले हाई कोर्ट ने जनहित याचिका में बहस सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था जो गुरुवार को जारी हुआ। कोर्ट ने सीबीआई जांच की मांग स्वीकारने से इंकार करते हुए कहा कि याचिका में ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया जिस वजह से सीबीआई जांच के आदेश दिए जाएं। कोर्ट ने डीजीपी से कहा है कि वे तत्कालीन टीआई सहित उन अधिकारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करें जिन्हें ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में लापरवाही का दोषी पाया है।

यह है मामला

मित्रबंधु नगर निवासी 30 वर्षीय कविता रैना 24 अगस्त 2015 दोपहर में बेटी को स्कूल बस से लेने के लिए घर से निकली थी, लेकिन लौटी नहीं। दो दिन बाद पुलिस ने उसका शव नवलखा क्षेत्र स्थित नाले से बरामद किया। यह 6 टुकड़ों में था और दो बोरों में बंद था। हत्यारे ने कविता के दोनों पैर, दोनों हाथ, धड़, गर्दन अलग-अलग कर दिए थे। पुलिस ने कविता की हत्या के आरोप में आरोपित महेश बैरागी को हिरासत में लिया था।

ढाई साल सेशन कोर्ट में प्रकरण की सुनवाई के बाद 18 मई 2018 को कोर्ट ने महेश को बरी कर दिया। सेशन कोर्ट ने फैसले में पुलिस की जांच पर भी तल्ख टिप्पणी की। यह भी लिखा कि प्रकरण की जांच कर रहे तत्कालीन टीआई राजेंद्र सोनी ने मामले में लचर जांच की है। न सबूत जुटाए न असली आरोपी तक पहुंचने का प्रयास किया। ऐसा लगता है जैसे जांच अधिकारी का सिर्फ एक ही उद्देश्य था कि महेश को आरोपित साबित किया जा सके।

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