इंदौर, नईदुनिया रिपोर्टर। लेखक केविन मिसेल की उम्र महज 22 साल है। लेकिन भारतीय और ग्रीक माइथोलॉजी में गहरी रुचि के चलते वो इनमें कमाल की पकड़ रखते हैं। यही वजह है कि उनकी किताब 'धर्मयोद्धा कल्कि, अवतार ऑफ विष्णु' की एक लाख से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं। इसके बाद हाल ही में कुछ समय पहले आई इस सीरीज की दूसरी किताब 'सत्ययोद्धा कल्कि, दि आई ऑफ ब्रह्मा' की भी 34 हजार से अधिक प्रतियां हाथोहाथ सेल आउट हो गई हैं।

इन दोनों किताबों के देश-विदेश की कई भाषाओं में अनुवाद भी हो रहे हैं। केविन कहते हैं कि इससे पहले भी मेरी तीन किताबें आई थीं लेकिन माइथोलॉजी से जुड़ी इन दोनों किताबों की कामयाबी ने साबित कर दिया कि आज के दौर के युवाओं की भी अपनी परंपराओं और माइथोलॉजी में दिलचस्पी बरकरार है। क्योंकि मेरे पाठकों में ज्यादातर यूथ ही हैं। नईदुनिया के सहयोग से हैलो हिंदुस्तान द्वारा आयोजित किए जा रहे 'इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल' में शामिल होने के लिए इंदौर आ रहे केविन ने खास चर्चा में बताया कि अगले साल सर्दियों के मौसम में वो इस माइथोलॉजिकल सीरीज की तीसरी किताब लेकर आ रहे हैं।

वो कहते हैं कि यूं तो किस्से कहानियों में मेरी बचपन से ही गहरी रुचि रही है लेकिन माइथोलॉजी की कहानियां मुझे खासतौर पर आकर्षित करती हैं। इसकी वजह है इनके बेहद इंट्रेस्टिंग सब्जेक्ट। हालांकि कई प्रसंग ऐसे भी हैं जिन पर इस दौर के लोग शायद यकीन करने में झिझकते हैं, लेकिन इसके बावजूद उनसे हमें आज की भी कई समस्याओं के समाधान मिल जाते हैं। शायद यही इनके कालजयी होने की सबसे बड़ी वजह है। राजनीति में मेरी गहरी रुचि है लेकिन मुझे लगता है कि अभी पॉलिटिकल सब्जेक्ट्स पर लिखने के हिसाब से मेरी सोच मैच्योर नहीं हुई है।

ऑनलाइन-ऑफलाइन की दिलचस्प जंग

बकौल केविन... इसमें कोई शक नहीं कि भविष्य ऑनलाइन का है, लेकिन फिलहाल तो ऑनलाइन और ऑफलाइन सेलिंग में बहुत दिलचस्प जबरदस्त जंग चल रही है। हालांकि देशभर के बुक्स स्टोर्स वालों से बातचीत के दौरान ये सच्चाई सामने आती है कि मार्केट ऑनलाइन डॉमिनेटेड होता जा रहा है। क्योंकि अगर एक चीज आपको एक क्लिक पर डिस्काउंट के साथ मिल रही है तो उसे परचेज के लिए आप एक- दो घंटे खराब करके स्टोर्स तक क्यों जाएंगे? मुझे लगता है कि इन कंडीशंस में फाइट में बने रहने के लिए बुक स्टोर्स ऑनर्स को जल्द से जल्द कुछ नए और इनोवेटिव तरीके आजमाने पड़ेंगे।