इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि Guru Pushya Nakshatra 2021 । ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्रों के चक्र में पुष्य आठवां नक्षत्र होता है। इसे नक्षत्रों का राजा कहा गया है। इस नक्षत्र के देवता बृहस्पति और स्वामी शनि हैं। सभी नक्षत्रों में इसे सर्वाधिक शुभ नक्षत्र की संज्ञा दी गई है।

स्थाई महत्व के तथा शुभ कार्यों के लिए पुष्य नक्षत्र का विशेष महत्व माना गया है। ज्योतिर्विद धर्मेंद्र शास्त्री के अनुसार विशेष रूप से दीपावली के पूर्व आने वाला पुष्य नक्षत्र शुभ फलदाई होता है। वार के साथ पुष्य नक्षत्र का संयोग होने से गुरु पुष्य, रवि पुष्य, सोम पुष्य, बुध पुष्य जैसे महायोगों का निर्माण होता है। इसमें खरीदी करने का विशेष महत्व माना गया है। दीपावली से पूर्व आने वाले पुष्य नक्षत्र में लक्ष्मी कुबेर पूजन के साथ खरीदारी का महा मुहूर्त प्राप्त होता है। इसमें बाजारों में खरीदी की जाती है।

इसलिए विशेष महत्व माना गया

दीपावली के पूर्व आने वाले पुष्य नक्षत्र का विशेष महत्व माना गया है । मान्यता है कि यह नक्षत्र खरीदारी का महा मुहूर्त तो होता ही है। साथ ही यहीं से लक्ष्मी कुबेर पूजन का प्रारंभ भी हो जाता है। इस बार गुरु एवं शनि की मकर राशि मे युति के साथ इस दिन गजकेसरी योग का निर्माण भी कर रहे है। 28 अक्टूबर को सुबह 9:42 पर पुष्य नक्षत्र प्रारंभ हो गया। इसी दिन सर्वार्थसिद्धि तथा अमृत सिद्धि योग अहोरात्र अर्थात संपूर्ण दिन रात व्याप्त रहेगा।

पुष्य नक्षत्र में क्या खरीदे

यह दिन स्थाई महत्व के कार्यों को करने के लिए एवं दीपावली से पूर्व खरीदारी करने का शुभ मुहूर्त माना गया है। मान्यताओं के अनुसार यह योग धनतेरस की भांति ही शुभ माना गया लाभ, अमृत व शुभ चौघड़िया में आभूषणों की खरीदारी करना जबकि चर चौघड़िया में वाहन तथा मशीनरी की खरीदारी करना शुभ होगा। पुष्य नक्षत्र में सोने की खरीदारी का विशेष महत्व माना गया है।

पुष्य का स्वामी शनि, दान का महत्व

शास्त्रीय मान्यताएं हैं कि पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि होता है तथा शनि वृद्धि करने वाला ग्रह माना गया है। यही कारण है कि दीपावली के पूर्व आने वाले पुष्य नक्षत्र में खरीदारी करना शुभ होता है। यह भी मान्यता है कि इस नक्षत्र में सामग्री का क्रय करने से वर्ष पर्यंत घर में बरकत इत्यादि आती है। गुरु पुष्य नक्षत्र के दिन जरूरतमंद लोगों को वस्त्र, भोजन सामग्री तथा दैनिक आवश्यकताओं की वस्तुओं का दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है । शनि तथा बृहस्पति के दोषों का निवारण होता है। इस दिन पीपल के वृक्ष में चने की दाल तथा गुड़ अर्पित करते हुए दीप दान करना चाहिए । पेड़ की सात परिक्रमा करनी चाहिए। गुरु पुष्य नक्षत्र तंत्र मंत्र की सिद्धि के लिए भी विशेष महत्व का माना गया है। अतः इस दिन अपने इष्ट का साधन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए।

Posted By: Sameer Deshpande

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