Krishi Vigyan Kendra Indore: जितेन्द्र यादव, इंदौर। इलेक्ट्रान बीम विकिरण (इर्रेडिएशन) से बीज के डीएनए में सकारात्मक बदलाव लाने का ताजा उदाहरण इंदौर के कस्तूरबा ग्राम स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) में देखने को मिल रहा है। यहां लाल मक्का के बीजों पर इलेक्ट्रान बीम विकिरण डालकर पौधे की ऊंचाई करीब दो फीट तक घटाई गई है और भुट्टे की लंबाई दो-ढाई इंच तक बढ़ाई गई है। केवीके ने राजा रमन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केंद्र (आरआरकैट) के सहयोग से लाल मक्का की पैदावार बढ़ाने के लिए यह प्रयोग किया है।

इस मक्का के पौधे की ऊंचाई पहले सामान्यत: साढ़े नौ फीट होती थी जो विकिरित बीज के उपयोग से घटकर करीब साढ़े सात फीट हो चुकी है। इसी तरह भुट्टे की लंबाई 11 इंच थी जो 13-13.5 इंच के आसपास हो चुकी है। इससे उत्पादन बढ़ेगा। माना जा रहा है कि विकिरण की वजह से पौधे की ऊंचाई बढ़ाने में उपयोगी पोषक तत्व भुट्टे की लंबाई बढ़ाने का काम करने लगे। प्रयोग के तौर पर कृषि विज्ञान केंद्र में इस मक्का की कुछ लाइन बोई गई हैं।

अब अगले साल किसानों को इस परिवर्तित मक्का बीज बोने के लिए दिया जाएगा। इसके बाद इसके गुणधर्म का अध्ययन किया जाएगा। केवीके के वरिष्ठ कृषि विज्ञानी और प्रधान डा. आलोक देशवाल ने बताया कि गुणधर्म का यह परिवर्तन स्थायी रहा तो यह बड़ी सफलता होगी। कुछ समय बाद ही यह फसल पक जाएगी, तब इसमें से बीज निकाले जाएंगे। लाल मक्का का मूल बीज चार साल पहले लुधियाना से लाया गया था।तबसे हम हर साल इसे उगा रहे हैं। देवास, उज्जैन, झाबुआ, अशोकनगर और महाराष्ट्र के कुछ किसानों को भी इसे उगाने के लिए दिया गया है।

आरआरकैट के कृषि उत्पाद विकिरण प्रसंस्करण सुविधा केंद्र के प्रभारी जिष्णु द्विवेदी बताते हैं कि इलेक्ट्रान बीम विकिरण से बीजों के डीएनए में परिवर्तन लाया जा सकता है। इन्हें बोने के बाद यह देखा जाता है कि विकिरित बीजों में से किसका गुणधर्म सकारात्मक बदलाव वाला रहा है। उस आधार पर आगे बोने के लिए चयन किया जाता है। दरअसल, प्रयोग के तौर पर विभिन्न् क्षमता का विकिरण डाला जाता है और उसके प्रभाव का अध्ययन किया जाता है।

खूबियों से भरा: कैंसररोधी, याददाश्त बढ़ाने वाला, ज्यादा प्रोटीन

- लाल मक्का में कई तरह के कैंसर रोकने के गुण हैं, जिसमें आंत, मुंह और स्तन कैंसर शामिल है।

- यह याददाश्त को बनाए रखने वाला और युवावस्था बढ़ाने वाला माना गया है।

- इसे फोर्टिफाइड (अतिरिक्त पोषक तत्व युक्त) अनाज के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

- सामान्य मक्का में 8-9 फीसद प्रोटीन होता है, जबकि लाल मक्का में 10.5 फीसद तक प्रोटीन है।

- इसकी फसल 100 से 110 दिन में पककर तैयार होती है।

- इसका औसत उत्पादन 24 से 25 क्िवटल प्रति हेक्टेयर होता है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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