Indore Uday Pratap Singh Column: उदय प्रताप सिंह, इंदौर, नईदुनिया। जनवरी में होने वाले प्रवासी भारतीय सम्मेलन में शहरवासियों की भागीदारी के उद्देश्य से प्रशासन के अफसरों ने पिछले दिनों बैठक का आयोजन किया। उद्देश्य यह था कि व्यापारी समाज संगठन के लोग आयोजन में कुछ जिम्मेदारी लें। बैठक के दौरान स्थिति यह बनी कि लोगों के सुझाव की बाढ़ आ गई। जो सुझाव मिले, उसके बाद नेताओं ने हाथ जोड़ लिए। अतिथियों को पतंग उड़ाने, उपहार देने, कबड्डी और स्थानीय खेल खिलाने के सुझाव आने लगे। आखिरकार महापौर को बीच बैठक में समझाना पड़ा उन्हें कुछ जिम्मेदारी भी लेनी है। इसके बाद लोगों ने जिम्मा लेना तय किया। हालांकि सभी को मालूम है कि इन दोनों कार्यक्रमों की कार्ययोजना केंद्र व राज्य स्तर से लगभग तय है। इसके बावजूद लोगों को इन आयोजनों से जोड़ने के बहाने इस तरह के सुझाव लिए गए। देखना यह है कि जितने सुझाव लिए गए, उनमें से कितने अमल में लाए जाते हैं।

डाक्टरों को क्यों है अफसर बनने का मोह

एमजीएम मेडिकल कालेज में चिकित्सकों को छात्रों की पढ़ाई और मरीजों के इलाज के जिम्मे के अलावा जब कभी प्रशासनिक जिम्मेदार दी जाती है तो वो उसे अतिरिक्त बोझ मानते हैं। अब मेडिकल कालेज में प्रशासनिक अफसर की नियुक्ति की बात चल रही है तो डाक्टर विरोध कर रहे हैं। आखिर इस विरोध की वजह क्या है, यह चर्चा का विषय है। मेडिकल कालेज में प्रशासक बैठा तो वहां का 300 करोड़ का बजट डाक्टरों के हाथों से फिसल जाएगा। जाहिर है कि ऐसे में इस बदलाव का विरोध तो होना ही था। प्रदेश के अन्य मेडिकल कालेजों में यह व्यवस्था लागू हो गई है तो इंदौर के डाक्टर इस बदलाव को अपनाने के लिए तैयार क्यों नहीं हैं। यह कई सवाल खड़े करता है। ओपीडी में मरीजों की भीड़ है और आपरेशन की कतार लगी है। ऐसे में डाक्टरों को प्रशासनिक कार्यों से मुक्त कर उनके मूल कार्यों में लगाना आखिर क्यों सही नहीं है।

सुर्खियों में बने रहना आता है मामा को

मामा के नाम से पहचाने जाने वाले एमआइसी सदस्य को सुर्खियों में बने रहना अच्छे से आता है। पिछले दिनों मामा कोतवाल के रोल में नजर आए। उन्होंने तीन इमली क्षेत्र में राशन का अनाज बेचने वाले एक आटो रिक्शा चालक को पकड़ा और फिर सुर्खियों में आ गए। मामा ने यह भी कहा कि जो काम खाद्य विभाग का है, वह काम हम कर रहे हैं। उन अफसरों को आराम करने के बजाय यह काम करना चाहिए। प्रधानमंत्री जन योजना के लिए लघु फिल्म में मजदूर का रोल करने के बाद मामा जागरूकता की लघु फिल्मों में 'भिखारी' और अन्य किरदार कर सुर्खियां बटोरने की तैयारी में जुटे हैं। मामा के इन नए कामों को देख लोग भी कहने लगे हैं कि भविष्य में मामा के कई रूप देखने को मिलेंगे।

भोजन पर मिश्राजी ने यूपी के अफसरों की क्लास ले ली

इंदौर के स्वच्छता माडल से अब यूपी के शहरों को भी नंबर-1 बनाने की कवायद की जा रही है। यही वजह से कि पिछले दिनों निगमायुक्त खुद लखनऊ गई और वहां के अफसरों को इंदौर का माडल समझाया। यूपी के मुख्य सचिव मिश्रा लगातार अपने अफसरों को इंदौर में बायो सीएनजी का प्लांट देखने भेज रहे हैं। पिछले दिनों यूपी के अफसर आए तो उनके पीछे अचानक मिश्रा भी इंदौर आ गए। उन्होंने भी बायो सीएनजी प्लांट देखा। अफसरों का इंदौर में उनके साथ भोज हुआ। मिश्रा ने वहीं पर अफसरों की क्लास ले ली और पूछ लिया आपने क्या सीखा। अफसर सोचने लगे गजब है साहब भोजन पर मीटिंग ले रहे। मिश्रा अभी तक तीन बार इंदौर आ चुके हैं। इस बार आए तो इंदौर के अफसरों से कोई मंदिर देखने की इच्छा जाहिर कर दी। खजराना मंदिर तो पहले ही जा चुके थे, तो अफसर उन्हें गोपाल मंदिर ले गए।

Posted By: Sameer Deshpande

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