इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। उज्जैनी वनक्षेत्र में तेंदुआ नजर आने के बाद वन विभाग ने आस-पास का जंगल छान मारा। मगर वनकर्मियों को सफलता हाथ नहीं लगी। चार दिन जंगल का निरीक्षण करने के बावजूद तेंदुए के मूवमेंट संबंधी कोई भी प्रमाण नहीं मिला। इसके लिए जगह-जगह लगाए गए नाइट विजन सीसीटीवी कैमरे और पिंजरे शनिवार को हटा दिए हैं। उधर कैमरे में दूसरे वन्यप्राणी कैद हो गए। उसके आधार पर अफसर ये मान रहे हैं कि तेंदुए ने जंगल का वह इलाका छोड़ दिया है।

12 नवंबर को ग्रामीणों ने तेंदुए को उज्जैनी वनग्राम में देखा था। तत्काल वन अफसरों को जानकारी दी। तुरंत अलग-अलग जगह चार सीसीटीवी कैमरे और तीन पिंजरे लगाए गए। 16 से 20 नवंबर के बीच विभाग ने जंगल का निरीक्षण कर तेंदुए की हलचल पता लगाने की कोशिश की। विभाग ने आठ पगडंडियों पर रेत बिछाई। ताकि तेंदुए के पैरों के निशान आ सकें। यहां तक जंगल में मवेशियों पर हमले के प्रमाण भी नहीं मिले। साथ ही ग्रामीणों ने भी दोबारा गांव में तेंदुआ नहीं दिखना बताया है। डिप्टी रेंजर टीआर हटिला ने बताया कि चार दिन के सीसीटीवी कैमरे के फुटेज भी देखे, लेकिन उसमें हिरण, लकड़बग्घा, सियार, खरगोश कैद हो गए। उन्होंने बताया कि सर्चिंग अॉपरेशन बंद कर दिया है। पिंजरे और कैमरे हटा दिए हैं।

दो बार आया नजर

उज्जैनी वनक्षेत्र में 31 अक्टूबर को पहली बार तेंदुआ नजर आया था। ग्रामीणों की सूचना पर विभाग ने तीन स्थानों पर पिंजरे भी लगाए। 24 घंटे के भीतर एक तेंदुआ कैद हुआ। बाद में मादा और दो शावकों के बारे में बताया। 12 नवंबर को दूसरी मर्तबा तेंदुए को खेतों में देखे जाने की बात सामने आई।

संभवत: दूसरे जंगल की अोर चला गया

वनकर्मियों के मुताबिक उज्जैनी वनक्षेत्र में तेंदुए की मौजदूगी को लेकर कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। अंदाजा लगाया जा रहा है कि वह आगे के जंगलों की तरफ निकल चुका है। वैसे उज्जैनी के जंगल की सीमा तिंछाफाल, तलाई, भेरुघाट और चोरल से मिलती है।

Posted By: dinesh.sharma

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