इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। रालामंडल अभयारण्य में अभी तेंदुए की मौजूदगी बनी है। लगातार तेंदुए की हलचल अभयारण्य में देखा जा रही है। कई बार वनकर्मियों ने जगह-जगह तेंदुए के पैरों के निशान देखे हैं। दो महीने से अभयारण्य में तेंदुए की दहशत कम नहीं हुई है। वन विभाग को राजस्व का काफी नुकसान हो रहा है। बीते दो महीनों में यहां पर्यटकों की संख्या में काफी गिरावट आ गई है। फिलहाल अभयारण्य सिर्फ छह घंटों के लिए खुल रहा है।

कोरोना की वजह से प्रदेश सरकार ने सभी पर्यटक स्थल पर बंद कर रखे थे। लॉकडाउन के चलते 24 मार्च से अभयारण्य बंद कर दिया। दोबारा रालामंडल को पर्यटकों के लिए एक अक्टूबर से खोला गया। यहां दो से चार अक्टूबर तक पर्यटक और वनकर्मियों को तेंदुए की हलचल देखने को मिली। गश्त बढ़ाने पर वनकर्मियों ने एक दिन तेंदुए को मोबाइल कैमरे में कैद किया। फिर इसके बाद वरिष्ठ अधिकारी हरकत में आएं। निर्देश के बाद अभयारण्य में जगह-जगह तेंदुए की मौजदूगी वाले पोस्टर लगाए ताकि पर्यटकों यहां सावधानी से घूम सकें। सुबह छह की बजाय अब रालामंडल सुबह 10 बजे पर्यटकों के लिए खोला जा रहा है। यहां तक शाम को भी दो घंटे पहले बंद किया जा रहा है। शाम चार बजे बाद पर्यटकों के लिए अभायरण्य में प्रवेश बंद है। वनकर्मियों के मुताबिक 18-22 अक्टूबर के बाद फिर कुछ पर्यटकों ने 10 नवंबर को तेंदुए की हलचल देखी थी। साथ ही अभयारण्य में पैरों के निशान भी मिले थे। रेंजर आकांक्षा खातरकर का कहना है कि पर्यटकों को ग्रुप में घूमने के लिए भेजा जा रहा है। यहां तक उन्हें सिर्फ ट्रैक पर जाने की अनुमति है। इधर-झाड़ियों में बैठने के लिए मना किया है। दिनभर में स्टॉफ तीन-चार बार गश्त लगाता है। अभी भी पगमार्क मिल रहे हैं।

नहीं आए रहे 100 पर्यटक भी

तेंदुए की मौजूदगी ने रालामंडल की आय पर असर डाला है। दहशत के चलते पर्यटक यहां आने से कतरा रहे हैं, जो घूमने आते हैं वे सिर्फ डियर सफारी कर लौट रहे हैं। आमतौर पर जहां 300-400 पर्यटक रोजाना आते थे। वहीं अब इनकी संख्या 100 तक नहीं पहुंच रही है। यहां तक परिवार का आना लगभग कम हो चुका है।

Posted By: gajendra.nagar

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