नवीन यादव, इंदौर Indore News। भूमाफिया का शिकार बनी शहर की गृह निर्माण संस्थाओं के सदस्यों पर कोरोना की दूसरी लहर एक कहर बन के टूटी है। सालों से अपने प्लाट का इंतजार कर रहे सदस्यों की जब प्लाट लेने की बारी आई, तो कई जानें ही चली गई। अब स्वजन एक बार फिर उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन तेजी दिखाएगा और अब प्लाट मिल ही जाएंगे। जिन पर आशियाना बना लेंगे, तो मृतकों की आत्मा का शांति मिल जाएगी।

पाटनीपुरा पर रहने वाले राहुल तिवारी की मां माया तिवारी ने 90 के दशक में यह प्लाट लिया था। उस समय राहुल की उम्र महज कुछ साल थी। राहुल सालों से अपनी मां को प्लाट का कब्जा दिलवाने का प्रयास कर रहे थे। पिछले दिनों जब कलेक्टर ने अभियान चलाया तो उसके बाद पुष्प विहार संघर्ष समिति बनी थी। उसमें राहुल सबसे युवा सदस्य थे। वे लगातार बैठकों में शामिल होने के साथ पात्र सदस्यों के दस्तावेज एकत्रीकरण जैसे महत्वपूर्ण काम कर रहे थे, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में उनका निधन हो गया। भाई राकेश तिवारी ने बताया कि बड़े भाई लंबे समय से इसके लिए प्रयासरत थे। मार्च माह में घर पर एक पत्र भी आ गया था। अब उम्मीद थी कि जल्द प्लाट मिल जाएगा,लेकिन भैया का निधन हो गया।

संघर्ष समिति के अध्यक्ष एनके मिश्रा बताते है, अकेले राहुल तिवारी ही नहीं है। हमारे ऐसे कई सदस्य है। जो कोरोना के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं। हंसराज वर्मा, पूनम राठौर, रामप्रसाद राठौर, हेमंत जैन, संदीप मेहता, डा. महेश पाठक सहित हमारे कई सदस्य जीवनभर प्लाट के लिए प्रयास करते रहे, लेकिन इस दूसरी लहर में कोरोना से हार गए।

मिश्रा ने बताया शहर में भूमाफिया के चक्कर में आकर हजारों लोग प्लाट के लिए तरस रहे है। अकेले पुष्पविहार कालोनी में 1200 सदस्य हैं। इसमें से कई ऐसे हैं, जिन्होंने युवा अवस्था में प्लाट लिया था, लेकिन अब तक इंतजार कर रहे हैं। अभी भी 300 से अधिक लोग हैं, जो प्लाट के लिए इंतजार कर रहे हैं। कई लोगों ने प्लाट पर बाउंड्रीवाल बना ली है, जबकि कई लोगों की मार्किंग मिट गई है। हम लगातार अधिकारियों के संपर्क में हैं। जल्द ही शेष सदस्यों को प्लाट दिलवाएंगे।

ऐसे हुआ था पुष्पविहार में घोटाला

1990 में मजदूर पंचायत गृह निर्माण संस्था ने पुष्पविहार को विकसित करना शुरू किया था। 2006 में संस्था की जमीन को केशव नाचानी को दो करोड़ में बेच दिया गया। 50 लाख का चेक दिया और फर्जी खाता खोल दिया और उसने चेक केश करा लिया, जबकि जमीन को बैंक के पास बंधक लोन भी ले लिया। जिससे जमीन उलझ गई और पात्र सदस्य प्लाट के लिए परेशान होते रहे।

Posted By: Sameer Deshpande

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