इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। शहर का कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय शेरों की दहाड़ से गूंजता है। इन्हें देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ भी जुटती है, लेकिन जल्द ही शेर का एक जोड़ा इंदौर के चिड़ियाघर से विदा हो सकता है। इसके बदले इंदौर में ऐसे पक्षी के आठ जोड़े आएंगे, जो उड़ नहीं सकते। इसके लिए इंदौर और त्रिवेंद्रम के चिड़ियाघर के बीच सहमति बन चुकी है। अब दिल्ली से हरी झंडी मिलने का इंतजार है।

इंदौर के चिड़ियाघर में 13 शेर हैं। चिड़ियाघर के एजुकेशन आफिसर निहार पारुलकर ने बताया कि इंदौर और त्रिवेंद्रम के चिड़ियाघर के बीच लंबे समय से वन्य प्राणियों के आदान- प्रदान को लेकर चर्चा चल रही है। छह महीने पहले आधिकारिक पत्राचार भी शुरू हुआ। मार्च में इंदौर ने अपनी सहमति दे दी थी, वहीं अप्रैल में त्रिवेंद्रम से भी सहमति मिल गई थी। अब निर्णय पर औपचारिक मुहर दिल्ली में होने वाली केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की बैठक में लगेगी। उम्मीद है कि जून तक इस मामले में निर्णय हो जाएगा। दिल्ली से हरी झंडी मिलते ही शेर के जोड़े को रवाना कर दिया जाएगा।

विश्व में नहीं उड़ पाने वाली चार प्रजातियों में से तीन प्रजातियों के पक्षी इंदौर में, चौथा भी आएगा - पारुलकर ने बताया कि दुनिया में पक्षियों की चार प्रजातियां ऐसी हैं, जो उड़ नहीं सकते। इनमें से तीन इंदौर के चिड़ियाघर में हैं जबकि चौथी त्रिवेंद्रम से यहां आएगी। इसका नाम रेआ है। इसके चार जोड़े (कुल आठ) इंदौर आएंगे। साथ ही बायसन का एक जोड़ा (कुल दो) भी साथ में आएगा। अभी शुतुरमुर्ग, इमू और कैसावेरी प्रजाति के पक्षी इंदौर में हैं, जो उड़ नहीं सकते। रेआ ब्राजील, दक्षिण अमेरिका और अर्जेंटीना में पाया जाता है। यह चार से पांच फीट तक लंबा होता है जबकि वजन करीब 50 किलो होता है। चलते या दौड़ते समय यह पंखों से संतुलन बनाता है।

Posted By: Hemraj Yadav

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