Literature Festival Indore: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। साहित्य का समाज पर प्रभाव, स्त्री की स्थिति, लेखन के आयाम और विषय, देश की स्थिति, परिवार आदि विषयों को लिए शनिवार को देश के नामी रचनाकारों और विचारकों ने अपनी बात रखी। हेलो हिंदुस्तान द्वारा आयोजित तीन दिवसीय इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन परिवार से लेकर देश-दुनिया तक के मुद्दों पर चर्चा हुई। सुबह से शाम तक चले वैचारिक मंथन के दौर में वक्ताओं ने कई अहम मुद्दों पर बेबाकी से बात रखी।

"स्त्री: समय बदला है सोच नहीं" विषय पर वंदना राग और उर्मिला शिरीष ने कहा कि आज बेशक वक्त बदल गया है, लेकिन कई मायनों में अभी भी लोगों की सोच में बहुत बदलाव नहीं आया। समाज में स्त्री की भूमिका, उसका दायित्व, अधिकार वही है। देश में बेशक महिलाओं के कदम राजनीति में आए, आरक्षण के माध्यम से सरपंच महिला बनी लेकिन सत्ता उनके परिवार के पुरुषों की ही चलती है। इसी तरह लेखन में भी अधिकांश यही देखा गया है कि स्त्री यदि लिख रही है तो विषय में स्त्री स्वभाव या उनके इर्द-गिर्द विषयों की ही बात की जाती है। कई हद तक महिलाएं भी इन विषयों से निकलना नहीं चाहतीं।

महिला लेख में छूट रहे हैं कई मुद्दे - महिला लेखन पर गगन गिल ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अभी भी महिला लेखन में कई मुद्दे छूट रहे हैं। मेरा मानना है कि लेखक को अपने लेखन को तोड़ते और फिर उसे गढ़ते आना चाहिए। रवींद्रनाथ टैगोर की कविताओं से कविता लेखन के गुर सीखे जा सकते हैं कि किस तरह उन्होंने कविताओं को पाठकों के दिलों में घर बनाने पर विवश कर दिया। जहां तक बात मेरे लेखन की है तो वह एक रहस्य है क्योंकि मैं हर बार एक नए विषय पर लिखती हूं और लेखन से पहले मैं बहुत पढ़ती हूं खास तौर पर गंभीर विषयों को।

आज भी कविता भटक रही है - अपने जीवन के पन्नों को पलटते हुए लीलाधर जगूड़ी ने बचपन में घर छोड़ने की घटना से आज तक के सफर को बयां किया। इसके साथ ही उन्होंने साहित्य पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि जब वे कक्षा आठवीं में थे तब से कविता पढ़ने और लिखने के प्रति आकर्षित हो गए थे। मुझे लगता है कि उस वक्त भी कविता भटकती थी और आज भी यही हो रहा है। तब हमारे महान कवियों ने जो कविताएं लिखीं वे बहुत स्वच्छ थीं और उस दौर को छायावाद नाम दिया गया जबकि मुझे लगता है कि उसे स्वच्छवाद नाम दिया जाना चाहिए था।

संवाद नहीं होने से संवेदना हो रही खत्म

साहित्य और सिनेमा में लिव इन रिलेशनशिप और भारतीय मूल्य विषय पर विकास दवे, चक्रपाणिदत्त मिश्र, अंतरा करवड़े और गरिमा दुबे से ज्योति जैन ने चर्चा की। इसमें वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि परिवार का टूटना, लोगों का अलग-अलग रहना ही खत्म होती संवेदना की जड़ है। जब तक संवाद नहीं होगा, संवेदनाएं भी नहीं होंगी। बच्चे झूलाघर और बुजुर्ग आश्रम में रह रहे हैं ऐसे में हम समाज को किस दिशा में ले जा रहे हैं। अभिभावकों का फर्ज है कि वे बच्चों को वक्त दें, उनके साथ संवाद स्थापित करें और सही-गलत में अंतर बताकर संस्कारी बनाएं। जब तक विवाह संस्कार को नहीं निभाया जाएगा तब तक रिश्तों का टूटना और घुटना दोनों ही बना रहेगा। कार्यक्रम में गौरी द्विवेदी, दुर्गेश नंदिनी, रश्मिता शर्मा, रागिनी शर्मा, मीना गोदरे, प्रतिभा जैन, अरुण कमल, अश्विन सांघी आदि ने भी चर्चा की।

अभिनेता अन्नू कपूर ने जीता दिल

आयोजन का प्रिंट पार्टनर नईदुनिया है। आयोजन में शाम को संगीत की बात भी हुई जिसमें अभिनेता अन्नू कपूर ने अपनी जानकारी से श्रोताओं का दिल जीत लिया। आयोजन के तीसरे और अंतिम दिन रविवार को दीप्ति नवल, अजीत राय, सथ्य शरण, दुर्जोय दत्ता आदि चर्चा करेंगे। नईदुनिया द्वारा दोपहर 2. 35 बजे अपराध कथाओं का विस्फोटक संसार विषय पर सत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें सुरेंद्र मोहन पाठक चर्चा करेंगे।

आज के आयोजन -

  • सुबह 9.30 बजे - ओपन माइक
  • सुबह 10 बजे - मालवी बोली की टोली में माया बदेका, अशोक नागर, राजेश भंडारी, नरेंद्र मंडलोई, चकोर चतुर्वेदी आदि चर्चा करेंगे
  • सुबह 10.35 बजे - इंटरनेट मीडिया को नान सोशल होने से कैसे बचाएं पर महिमा वर्मा, मंजुला बोथरा, मोनिका पुरोहित, पंखुरी वक्त जोशी, रेखा अग्रवाल आभा मिश्रा की चर्चा
  • सुबह 11.10 बजे - माय लाइफ स्टोरीज विषय पर दीप्ति नवल चर्चा करेंगी
  • दोपहर 12.05 बजे - बालीवुड की बुनियाद पर अजीत राय से चर्चा
  • दोपहर 12.40 बजे - बिहाइंड द स्क्रींस विषय पर सथ्य शरन से चर्चा
  • दोपहर 1.25 बजे - मिले सुर मेरा तुम्हारा
  • शाम 6.30 बजे - मामे खान और बैंड की प्रस्तुति

लेक साइड लान में -

  • दोपहर 1.50 बजे - लघु कथा सत्र
  • दोपहर 2.35 बजे - अपराध कथाओं का विस्फोटक संसार विषय पर सुरेंद्र मोहन पाठक की चर्चा
  • दोपहर 3.30 बजे - सुधियों की संवादिनी- कविताएं
  • शाम 4 बजे - आफ कोर्स आइ लव यू विषय पर दुर्जोय दत्ता से चर्चा
  • शाम 4.50 बजे - गरिमा श्रीवास्तव के उपन्यास का विमोचन
  • शाम 5.15 बजे - कवि सम्मेलन
  • शाम 6 बजे - ओपन माइक

Posted By: Hemraj Yadav

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