Literature Festival Indore: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। हिंदू समाज से सवाल किया जाए कि संविधान और भारतीय संस्कृति-सभ्यता में किसका चुनाव करोगे तो 50 फीसद संविधान का चुनाव करेंगे। इसका मतलब है कि आप अपनी जीवन प्रणाली छोड़ने के लिए तैयार हैं। भारत के विभाजन की मानसिकता आज भी कायम है। यह सोच जिन्ना से शुरू होकर नेहरू पर समाप्त नहीं हुई। इसकी शुरुआत इससे पहले हो चुकी थी और आज भी है। भारत इंडिया और पाकिस्तान के बीच फंसकर रह गया है।

यह बात सुप्रीम कोर्ट के वकील और लेखक जे साईं दीपक ने शनिवार को डेली कालेज में कही। वे लिटरेचर फेस्टिवल में नईदुनिया द्वारा आयोजित विशेष सत्र में "भारत-पाकिस्तान : सभ्यता या राजनीतिक विभाजन" विषय पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विभाजन की मानसिकता मुगल शासन के समय ही आ गई थी। वास्तविक स्वतंत्रता संग्राम को समझने की आवश्यकता है। कांग्रेस में उस वक्त गरम और नरम दल के रूप में दो दल थे। एक दल की लड़ाई पूर्ण स्वराज के लिए थी। 1946 के चुनाव की बात की जानी चाहिए, कितने लोगों ने पाकिस्तान बनाने की बात कही। एक निर्णय हुआ था, लेकिन यह एक रात में बदल गया। पाकिस्तान बनने के बाद जो लोग यहां रह गए उनके पास विकल्प नहीं था। अब आवश्यकता आत्म रक्षा की तैयारी करने की है। 1940 तक लगा था कि पाकिस्तान नहीं बनेगा, लेकिन पाकिस्तान बना। संवाद उनके बीच होता है जो एक दूसरे को समान मानते हैं।

न्याय प्रणाली की अपनी सीमाएं

जे साईं दीपक ने कहा कि आत्मरक्षा की तैयारी करना आवश्यक है, क्योंकि न्याय प्रणाली की अपनी सीमाएं हैं। हर ताले की चाबी चोर के पास होती है। आपकी सुरक्षा की जिम्मेदारी स्टेट की है। अगर आपकी रक्षा नहीं होती तो फिर हर्जाना और श्रद्धांजलि मिलेगी। समाज को जागरूक होकर अपनी रक्षा की जिम्मेदारी स्वयं लेनी होगी। मेरा कहना है कि संविधान का उपयोग करें, लेकिन प्लान बी होना चाहिए। आत्मरक्षा आपका अधिकार है। आपको पता होना चाहिए कि आप किससे लड़ रहे हैं।

पहले स्वयं को भीतर से सशक्त करें

उन्होंने कहा कि एक समय था जब लोगों से कहा जाता कि मरो या बदलो तो वह मरने के लिए तैयार होते, लेकिन आज 70 फीसद लोग मरने के बजाए बदलने के लिए तैयार हो जाएंगे। आज आवश्यकता है अपनी जड़ों को मजबूत करने की। पहले स्वयं को भीतर से सशक्त करने की आवश्यकता है। हिंदुओं को अपनी संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है।

Posted By: Hemraj Yadav

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