उदय प्रताप सिंह, इंदौर (नईदुनिया)। पिछले दो माह से छप्पन दुकान बंद है। अभी यह तय नहीं है कि यहां लोगों की आवाजाही कब शुरू हो पाएगी। ऐसे में छप्पन दुकान के व्यापारी अब लोगों को घरों तक सॉफ्टवेयर और डिलिवरी सिस्टम का इस्तेमाल कर 'छप्पन' का स्वाद पहुंचाने की तैयारी में जुटे हैं। छप्पन दुकान के व्यापारी निगम व जिला प्रशासन के अफसरों के सामने जल्द ही ऑनलाइन फूड डिलिवरी के लिए अपना प्रस्ताव रखने वाले हैं। व्यापारियों ने ऑनलाइन फूड डिलिवरी के लिए एक कॉमन सॉफ्टवेयर के उपयोग की तैयारी कर ली है। इसके लिए संबंधित एजेंसी सॉफ्टवेयर भी तैयार कर रही है। इसके अलावा छप्पन दुकानों से ऑनलाइन फूड डिलिवरी के लिए भी एक कॉमन सिस्टम बनाया जा रहा है। इसी तरह सराफा चौपाटी से जुड़े दुकानदार भी फूड ऐप के माध्यम से लोगों तक सराफा का स्वाद पहुंचाने की योजना पर काम कर रहे हैं।

फूड आइटम बुलवाने पर नहीं देना होगा अलग सर्विस चार्ज

अभी तक छप्पन दुकान के आउटलेट से कई लोग फूड ऐप के माध्यम से ऑर्डर करते थे। कई बार अलग-अलग दुकानों से खाने-पीने की चीजें बुलवाने पर लोगों को अलग-अलग सर्विस चार्ज भी देना होता था। लेकिन अब व्यापारी ऐसी तैयारी कर रहे हैं कि एक डिलिवरी सिस्टम होने के कारण छप्पन दुकान पर फूड ऑर्डर के लिए डिलिवरी बॉय की भीड़ भी नहीं लगेगी। यदि किसी व्यक्ति को अपने घर यहां के अलग-अलग आउटलेट से खाने-पीने की सामग्री बुलानी होगी तो वो एक कॉमन सर्विस चार्ज के माध्यम से चीजें अपने घर तक बुलवा सकेगा। इसके लिए छप्पन दुकान परिसर में एक कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। कंट्रोल रूम की टीम दुकानों से फूड ऑर्डर के पैकेट एकत्र करने डिलिवरी बॉय को देगी।

व्यापारियों ने साफ-सफाई की मांगी अनुमति

छप्पन दुकान एसोसिएशन के अध्यक्ष गुंजन शर्मा के मुताबिक, व्यापारियों का पिछले दो माह से धंधा ठप पड़ा हुआ है। यहां के दुकानदारों ने दो माह पहले भी परिसर का कायाकल्प होने के लिए अपनी दुकानें बंद रखी थीं। दुकानदारों को उम्मीद नहीं थी कि आगे दो माह तक दुकानें बंद करनी पड़ेंगी। ऐसे में कई दुकानों में अब भी काफी मात्रा में भोजन सामग्री तैयार करने का सामान रखा हुआ है। ऐसे में यहां के व्यापारियों ने जिला प्रशासन व निगम से दुकानों में रखा सामान हटाने व साफ-सफाई के लिए अनुमति मांगी है। इसके लिए एसोसिएशन ने शुक्रवार को कलेक्टर को पत्र लिखा है।

छप्पन दुकान : एक नजर

- 1978 में बना था छप्पन दुकान मार्केट

- 30 मालिक हैं यहां अलग-अलग दुकानें के

- 20 दुकानदार सामने वन सेंटर में हैं

- 50 दुकानों का प्रतिदिन का टर्नओवर 15 से 20 लाख रुपये

- 8 से 10 हजार लोग प्रतिदिन पहुंचते है यहां वीकेंड व त्योहार पर

सराफा बाजार : एक नजर

- 60 से 70 साल पहले से शहर में लग रही सराफा चौपाटी

- 9 बजे रात से 2 बजे रात तक लगती थी चौपाटी

- 70 दुकानें हैं रात्रिकालीन सराफा चौपाटी एसोसिएशन की

- 60 अन्य दुकानें भी जो एसोसिएशन में रजिस्टर्ड नहीं

- 2 माह में डेढ़ से दो करोड़ रुपये का नुकसान हुआ

फूड ऐप से डिलिवरी की योजना पर कर रहे विचार

सराफा रात्रीकालीन चौपाटी एसोसिएशन भी ऑनलाइन फूड डिलिवरी की योजना बना रहा है। एसोसिएशन के अध्यक्ष राम गुप्ता के मुताबिक, हम जमैटो, स्वीगी जैसी ऑनलाइन फूड डिलिवरी एजेंसियों के माध्यम से घरों तक फूड आइटम पहुंचाने की योजना बना रहे हैं। हम खुद भी अपना एक ऐप तैयार करने वाले हैं। भले ही रात में सराफा की दुकानें बंद होने के बाद ओटलों पर चौपाटी लगती थी लेकिन कई लोगों की खुद की दुकानें व कई ने आसपास के आधा किलोमीटर के एरिया में गोडाउन भी किराए पर ले रखे हैं। वहां दुकानदार अपना सामान व गुमटियां-ठेले रखते थे। सिर्फ कच्चा माल घर से तैयार करके लाते थे। इन गोडाउनों पर अब सामान तैयार कर लोगों को घरों तक पहुंचाने की योजना पर चौपाटी एसोसिएशन के अधिकारी काम कर रहे हैं। इससे लोगों को घर तक सराफा का स्वाद मिल सकेगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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