इंदौर । लॉक डाउन के चलते ठप्प पड़े उत्पादन से बाजार में दालों की कमी बताई जा रही है। सरकार ने आपूर्ति श्रृंखला की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए नेफेड को अपने स्टॉक के दलहन की बिक्री बढ़ाने के लिए कहा है। मंडिया बंद होने, श्रमिकों की किल्लत और परिवहन सुविधाओं के अभाव में दाल मिलें कच्चे माल की कमी का सामना कर रही हैं।

नेफेड के मार्फत दलहन आपूर्ति बढ़ती है तो दालों की आपूर्ति में अगले एक हफ्ते में सुधार हो सकता है। देश भर की अनाज मंडियां बंद होने से मिलों को कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है, जिससे दाल मिलें 40 फीसदी से भी कम क्षमता के साथ काम कर रही हैं।

21 दिन की देशव्यापी बंदी से आवश्यक और गैर-आवश्यक जिंसों की ढुलाई भी ठप हो गई है। हालांकि जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति स्थानीय प्रशासन की अनुमति से करने की छूट दी गई है, इसके बावजूद दालों की आपूर्ति बाधित हो रही है। तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत को देखते हुए सरकार ने मंडियों को कुछ शर्तों के साथ परिचालन की अनुमति दी है। मध्य प्रदेश में सभी जगह मंडियां बंद है।

महाराष्ट्र, राजस्थान तथा अन्य कृषि केंद्रित राज्यों की मंडियां भी धीरे-धीरे खुल रही हैं और आपूर्ति में कुछ सुधार हो रहा है। स्थिति सामान्य होने में कुछ हफ्ते लग सकते हैं मगर दालों की आपूर्ति हफ्ते भर में सुगम होने की उम्मीद नेफेड की दलहन आपूर्ति बढ़ने से बंधी है।

सबसे बड़ी चुनौती कच्चे माल की है। मंडी बंद होने से आपूर्ति प्रभावित हुई है। नेफेड द्वारा टेंडर के माध्यम से बढ़ी मात्रा में स्टॉक के चने की बिक्री की गई है। अगर समय रहते इसकी कागजी खानापूर्ति और डिलीवरी मिलों को हो जाती है तो दालों की आपूर्ति सुगम हो सकती है।

सरकारी खरीद एजेंसी नेफेड ने कच्चा माल मुहैया कराने के लिए मंडियों के साथ समझौता किया है। सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत केंद्र और राज्य सरकारों ने प्रत्येक लाभार्थी को तीन महीने तक 1-1 किलो दाल देने का निर्णय किया है। इसके लिए कई टन दाल की जरूरत होगी।

Posted By: Sandeep Chourey

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