इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि), Lockdown in Indore। इंदौर में सात दिन का लाकडाउन बढ़ाने का व्यापारी विरोध कर रहे हैं, इन्हें आशंका सता रही है कि ऐनवक्त पर निर्णय बदलने वाला प्रशासन लाकडाउन की अवधि इसी तरह आगे और भी बढ़ा सकता है। दरअसल शनिवार की बैठक में जो निर्णय हुआ, उसकी भूमिका शुक्रवार की रात को ही तैयार कर ली गई थी। इस पर आपदा प्रबंधन समिति के सदस्य और पूर्व महापौर कृष्णमुरारी मोघे ने यह आश्वासन दिया है कि 19 अप्रैल के बाद लाकडाउन को नहीं बढ़ाया जाएगा। शनिवार को मुख्यमंत्री के साथ बैठक में उन्होंने ही शहर में लाकडाउन का प्रस्ताव रखा था। मुख्यमंत्री और प्रशासन की ओर से पहले मात्र शनिवार और रविवार को ही लाकडाउन रखने की घोषणा की गई थी।

आपदा प्रबंधन समिति के सदस्य मोघे और कलेक्टर मनीष सिंह की रात में रेसीडेंसी कोठी पर लंबी बैठक हुई। भाजपा प्रवक्ता जेपी मूलचंदानी भी बैठक में मौजूद रहे। शहर के बिगड़ते हालात और इंजेक्शन से लेकर आक्सीजन तक के प्रबंध पर हुई चर्चा में ही तय कर लिया गया था कि मुख्यमंत्री को लाकडाउन के विस्तार का प्रस्ताव दिया जाए। शनिवार को जब वीडियो कांफ्रेसिंग हुई तो मोघे ने ही मुख्यमंत्री के सामने पूरी समिति की ओर से प्रस्ताव रख दिया कि इंदौर में लाकडाउन को शुक्रवार तक बढ़ा दिया जाए। शनिवार और रविवार पहले से घोषित हैं। ऐसे में 19 अप्रैल तक शहर में गतिविधियां बंद रखी जा सकेंगी।

मोघे ने नईदुनिया को बताया कि समिति ने ही मुख्यमंत्री को प्रस्ताव दिया कि लाकडाउन किया जाए। इस पर मुख्यमंत्री ने भी सहमति देते हुए निर्णय समिति पर ही छोड़ दिया। दरअसल मुख्यमंत्री और समिति नहीं चाहते कि लंबा लाकडाउन लगे जिससे आर्थिक नुकसान हो और व्यापारियों या लोगों की परेशानी बढ़े। 19 अप्रैल तक लाकडाउन इसलिए किया जा रहा है कि शहर में महामारी के बढ़ते प्रकोप से निपटने के लिए आपात व्यवस्थाएं जुटाई जा सकें। सात दिनों में मरीजों की चिकित्सा और सहायता के लिए सभी आवश्यक प्रबंध कर लिए जाएंगे। एक-दो दिन में ही एक बड़ा आइसोलेशन और चिकित्सा सेंटर राधास्वामी सत्संग व्यास में तैयार किया जा रहा है। कुछ अन्य जगह भी ऐसे अस्थायी केंद्र बनाए जा रहे हैं। सरकार की ओर से फंड मंजूर कर दिया गया है।

दुकानों से नहीं फैल रहा कोरोना

19 अप्रैल तक के घोषित लाकडाउन के खिलाफ व्यापारियों ने विरोध भी शुरू कर दिया है। अहिल्या चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल ने कहा कि व्यापारी लाकडाउन के कदम का समर्थन नहीं करते। लाकडाउन बीमारी का इलाज नहीं है। इसके बजाय सरकार को शारीरिक दूरी मास्क जैसे नियमों के पालन पर जोर देना चाहिए या फिर सरकार लाकडाउन में होने वाले नुकसान का हर्जाना प्रभावित लोगों को दे। लाकडाउन में मात्र व्यापार का नुकसान नहीं होता है अपितु व्यापारियों को कर, बिजली व लोन चुकाने की दोहरी मार झेलनी पड़ती है। कई लोगों का रोजगार लाकडाउन से छिन जाता है। सरकार जहां चुनाव है, वहां और भीड़ जुटाने वाले शराब के आहतों को क्यों बंद नहीं कर देती? इंदौर रिटेल गारमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने भी लाकडाउन का विरोध करते हुए कहा कि मध्यमवर्गीय व्यापारियों की कमर लाकडाउन से टूट जाएगी।

Posted By: Prashant Pandey

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