इंदौर। Lok Adalat आपसी मनमुटाव के चलते सालों से अलग रह रहे पति-पत्नी कुटुंब न्यायालय की समझाइश के बाद एक बार फिर साथ रहने को तैयार हो गए। किसी ने बच्चों की खातिर समझौता किया तो किसी ने भविष्य को देखते हुए। शनिवार को कुटुंब न्यायालय में आयोजित लोक अदालत में 14 दंपती खुशी-खुशी साथ रहने को तैयार हुए। सालों से एक-दूसरे के खिलाफ कोर्ट में लड़ रहे इन दंपतियों को न्यायाधीशों ने समझाया कि अलग-अलग रहने में वह आनंद नहीं है, जो मिल-जुलकर रहने में है। पुत्री द्वारा पिता के खिलाफ दायर भरण-पोषण के तीन साल पुराने केस में भी समझौता हुआ। पिता भरण-पोषण के रूप में ढाई लाख रुपए देने को तैयार हुए।

छह साल की बेटी की तरफ देखो और फैसला लो

श्याम नगर निवासी तपस्या और उनके पति मनोज एक साल से अलग-अलग रह रहे थे। पति-पत्नी के बीच कुटुंब न्यायालय में तलाक का केस भी चल रहा था। दोनों की छह साल की बेटी माता-पिता के बीच चल रहे विवाद के चलते असहज थी। शनिवार को लोक अदालत में जज सुरभि मिश्रा ने पति-पत्नी को समझाया कि वे आपसी विवादों के बजाय बेटी के भविष्य के बारे में सोचें। क्या अलग-अलग रहकर वे उसे वैसा प्यार दे पाएंगे। कोर्ट की समझाइश का असर यह रहा कि गिले-शिकवे भुलकर पति-पत्नी साथ रहने को तैयार हो गए।

बेटी के भविष्य को देखते हुए तैयार हुए

विनोद और सीमा एक साल से अलग-अलग रह रहे थे। उनकी बेटी आराध्या जिसकी उम्र महज 3 साल है मां के साथ रह रही थी। पति-पत्नी के बीच छोटी-मोटी बातों से शुरू हुआ विवाद कोर्ट तक पहुंच गया था। शनिवार को लोक अदालत में जज ने पति-पत्नी को समझाया कि जो भी फैसला लो वह बच्ची के भविष्य को देखते हुए लो। माता-पिता अलग-अलग रहेंगे तो छोटी सी बच्ची के दिलो-दिमाग पर क्या असर पड़ेगा। समझाइश का असर यह हुआ कि दंपती साथ रहने को तैयार हो गए। इसी तरह मनीषा और पवन के बीच आपसी मनमुटाव था। मनीषा ने भरण-पोषण के लिए पवन के खिलाफ केस दायर कर रखा था। लोक अदालत में पीठासीन अधिकारी ने दोनों को समझाइश दी और दोनों एक बार फिर साथ रहने को तैयार हो गए।

तीन खंडपीठों में निबटे 84 केस

प्रोटोकॉल शाखा के विधिक प्रतिनिधि ब्रजेश भार्गव ने बताया कि लोक अदालत के लिए तीन खंडपीठें बनाई गई थीं। पहली पीठ में प्रधान न्यायाधीश सुबोध कुमार जैन, दूसरी में प्रथम अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश सुरभि मिश्रा और तीसरी खंडपीठ में द्वितीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश रेणुका कंचन ने प्रकरणों की सुनवाई की। 250 प्रकरण सुनवाई के लिए रखे गए थे। इनमें से 84 में आपसी समझौता हुआ। सालों से अलग रह रहे 14 दंपती कोर्ट की समझाइश के बाद साथ-साथ रहने को तैयार हो गए। प्रकरणों में पक्षकारों को साथ-साथ रहने की समझाइश देने में एडवोकेट अचला जोशी, एडवोकेट पीके जोशी, एडवोकेट प्रणय शर्मा आदि ने सहयोग दिया।

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