Lok Adalat in Indore : इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जीवन के 45 बसंत देख चुके और 25 साल साथ गुजारने के बाद नगर के एक दंपती ने न्यायालय में तलाक की अर्जी लगा दी थी। एक-दूसरे से अलग होने के लिए न्यायालय में पहुंचे दंपती न्यायालय कक्ष से जब बाहर निकले तो फिर से साथ चलने के लिए एक-दूसरे का हाथ थामे हुए थे। दहेज प्रताड़ना के आरोप के साथ अलगाव की तरफ बढ़ चुका एक युगल जब न्यायालय कक्ष से बाहर निकला तो फिर से एक होने का वादा कर चुका था। शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में कुटुंब न्यायालय ने अलग होने की दहलीज पर पहुंच चुके दंपतियों को फिर से एक करवाकर अनोखे अंदाज में न्याय दिया। समझाइश और समझौते के जरिए ऐसे कई परिवारों को फिर से बसा दिया गया। इससे संबंधित दंपतियों के चेहरों पर तो खुशी नजर आई। उनके परिवार के सदस्यों के चेहरों पर भी न्याय से संतोष का भाव उभरता दिखा।

47 वर्ष के कमल आर्य और 45 वर्ष की लीलाबाई का विवाह करीब 25 वर्ष पहले हुआ था। इनकी पांच संतान हैं और तीन का ये विवाह भी कर चुके हैं। संतानों के विवाह के बाद परिवार बढ़ा और रिश्तेदारों के दखल से दंपती में आपसी विवाद बढ़ने लगे। इस बीच 2019 में लीलाबाई ने पति का घर छोड़ दिया और मायके चली गई। 2021 में पति ने पत्नी को साथ रखने का प्रकरण न्यायालय में लगाया। इस पर पत्नी ने भी भरण-पोषण का प्रकरण प्रस्तुत कर दिया। लोक अदालत के दौरान न्यायाधीश प्रवीणा व्यास ने दंपती को उम्र के इस पड़ाव पर गलतफहमियां दूर करने के लिए समझाइश दी। इसके बाद दंपती ने न्यायालय के सामने ही पुराने विवाद समाप्त कर अपनी संतानों के साथ एक घर में रहने का वचन दिया। लोक अदालत में दोनों ने एक-दूसरे को माला पहनाकर फिर से अपना लिया।

दूसरों की बातों में न आएं - इसी तरह पारिवारिक विवाद में 28 वर्ष की नेहा और 30 वर्ष के रोहित चौहान भी कुटुंब न्यायालय पहुंचे थे। 2018 में ही दोनों का विवाह हुआ था। परिवार वालों के दखल पर दंपती में विवाद होने लगे। पत्नी ने पति के खिलाफ दहेज मांगने का आरोप लगाया और घर छोड़कर मायके चली गई। सालभर पहले न्यायालय में भरण-पोषण का वाद दायर कर दिया। न्यायालय में न्यायाधीश राकेश मोहन प्रधान ने नेहा को समझाइश दी कि दूसरों की बातों में न आएं। समझाइश के बाद दोनों पक्ष एक हुए और न्यायालय से मुस्कुराते हुए रवाना हुए।

सात हजार से ज्यादा मामले खत्म - शनिवार को आयोजित लोक अदालत में कुल सात हजार से ज्यादा पुराने प्रकरण निराकृत कर दिए गए। जिला न्यायालय में 6732 प्रकरणों का समझौते के माध्यम से निपटान हुआ। उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में 514 प्रकरणों का निपटारा हुआ। जिला न्यायालय में लोक अदालत की शुरुआत प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश सुबोध कुमार जैन ने महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव व जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनीष कुमार श्रीवास्तव के अनुसार लोक अदालत में निराकृत प्रकरणों में दावे के 457, सिविल प्रकृति के 89, विद्युत 121 व चेक अनादरण के 709 प्रकरण भी थे। इसके साथ ही बैंक रिकवरी, पारिवारिक विवाद, श्रम विवाद जैसे मामले भी थे। इन सभी प्रकरणों में कुल 48 करोड़ के अवार्ड व डिग्री, मुआवजा, वसूली के आदेश पारित किए गए।

Posted By: Hemraj Yadav

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